इंटरनेशनल डेस्क: नेपाल में इन दिनों एक खबर को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि हिमालय क्षेत्र में मिले यूरेनियम के भंडार को नेपाल सरकार अमेरिका को सौंपने की तैयारी कर रही है। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी अधिकारी के दौरे से बढ़ीं अटकलें
हाल ही में अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी समीर पॉल कपूर का नेपाल दौरा चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उनका यह दौरा केवल नेपाल तक सीमित है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। आमतौर पर अमेरिकी अधिकारी दक्षिण एशिया के दौरे में एक साथ कई देशों का दौरा करते हैं।
मुस्तांग में यूरेनियम भंडार की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, लो मानथांग क्षेत्र में यूरेनियम का बड़ा भंडार होने की बात कही जाती है। यह इलाका अपर मुस्तांग में स्थित है और चीन सीमा के काफी करीब है। बताया जाता है कि यहां करीब 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ‘मुस्तांग स्पेशल जोन’ बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
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क्या है पूरा मामला?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ‘पैक्स सिलिका’ नाम के एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के तहत अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को यहां यूरेनियम प्रोसेसिंग की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, नेपाल सरकार के कई पूर्व अधिकारियों ने ऐसे किसी समझौते से इनकार किया है। नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर खनाल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उन्हें इस तरह के किसी निर्णय की जानकारी नहीं है।
MCC प्रोजेक्ट
नेपाल और अमेरिका के बीच 2017 में एक समझौता हुआ था, जिसे Millennium Challenge Corporation (MCC) प्रोजेक्ट कहा जाता है। इसके तहत अमेरिका ने नेपाल में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आर्थिक सहायता दी थी। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि इसी प्रोजेक्ट के जरिए मुस्तांग क्षेत्र में संभावित यूरेनियम प्रोसेसिंग के लिए ऊर्जा सप्लाई की जा सकती है। हालांकि, यह भी अभी केवल अटकलों के दायरे में है।
नेपाल के पास सीमित संसाधन
जानकारी के अनुसार, नेपाल में यूरेनियम के संभावित भंडार की पहचान पहले भी की जा चुकी है, लेकिन इसे निकालने और प्रोसेस करने के लिए जरूरी तकनीक, पैसा और इंफ्रास्ट्रक्चर फिलहाल नेपाल के पास पर्याप्त नहीं है। इसलिए अगर भविष्य में इस पर काम होता है, तो किसी विदेशी सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।
संवेदनशील इलाका
मुस्तांग का यह क्षेत्र चीन सीमा के काफी नजदीक है। ऐसे में भारत और चीन जैसे पड़ोसी देश भी इस इलाके में किसी तीसरे देश की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहते हैं। इसलिए यह मामला केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि नेपाल सरकार ने यूरेनियम को लेकर किसी भी देश के साथ कोई आधिकारिक समझौता नहीं किया है, जो भी खबरें सामने आ रही हैं, वे रिपोर्ट्स और सूत्रों के दावों पर आधारित हैं।
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