Last Updated: September 24, 2026

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विश्व पुस्तक दिवस : पहचानो किताबों की बेशकीमती ताकत

April 23, 2026

विश्व पुस्तक दिवस : पहचानो किताबों की बेशकीमती ताकत

1995 से हर साल यूनेस्को 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाता है, 100 से ज़्यादा देशों में पढ़ने, प्रकाशन और प्रकाशनाधिकार को बढ़ावा देता है। यह विशेष दिवस हमें पुस्तकों के करीब जाकर उसकी महत्ता को जीवन में उतारने के लक्ष्य को साधने के लिए प्रेरित करता हैं। इस साल 2026 के लिए विश्व पुस्तक दिवस की थीम, “अपनी शैलीनुसार पढ़ें” यह है, जो पढ़ने के शौक को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

शैली दर्शाती है साहित्य में रुचि

यह शैली दर्शाती है कि, जिस प्रकार के भी साहित्य में रूचि हो, वह पढ़ें, पढ़ने की आदत डालें। पुस्तकें जीवन का प्रतिबिंब होती है, सच और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए पुस्तकें प्रेरित करती हैं। दुनिया भर के महानतम व्यक्ति अपनी खास उपलब्धि के लिए प्रसिद्ध हुए। पैसा, शोहरत, नाम, काम और व्यस्तता के बावजूद और हर मिनट के लाखों रुपये कमानेवाले उद्योगपति, खेल जगत के खिलाडी, नेता और फिल्मी नायक भी पुस्तकें पढ़ने के लिए रोजाना अपना कीमती समय थोड़ा ही सही लेकिन निकालते जरूर हैं।

पढ़ने के लिए भोजन छोड़ना बेहतर

क्या हम कभी पुस्तकें खरीदने के लिए आर्थिक समस्या से जूझने पर अपना एक वक्त का भोजन छोड़कर उससे पैसे बचाकर पुस्तकें खरीदने की कोशिश की हैं। विश्व में ज्ञान का प्रतिक कहलानेवाले भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने तंगी के दिनों में पुस्तकें खरीदने के लिए एक वक्त का भोजन तक त्याग दिया था, ताकि ज्ञानरूपी पुस्तकों का तेज आत्मसात कर सकें, ये होता है किताब के प्रति जूनून और किताब की महत्ता की समझ। अधिकतर बड़े-बड़े लोग अक्सर अपने घर में ही पुस्तकों का संग्रह बना लेते है, अर्थात निजी पुस्तकालय के तौर पर। पुस्तकों से बेहतर दुनिया में कोई साथी नहीं होता, पुस्तकें हमेशा हमें योग्य दिशा में चलने के लिए पथ प्रदर्शित करते है, पुस्तकें हमारे खाली समय को ज्ञान से सींचते है, बुद्धि को तिष्ण, जागरूक, समझदार बनाकर सत्य और असत्य के बिच अंतर करना सिखाते हैं।  हम पुस्तकों और शिक्षा के बल पर दुनियाभर में हर क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

प्रकाशन और लेखक सम्मान बढ़ाता है पुस्तक प्रेम

विश्व पुस्तक दिवस पढ़ने, किताबें, प्रकाशन, लेखक सम्मान और प्रतिलिप्यधिकार जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता हैं। आधुनिक ज़िंदगी में किताबों की अहमियत आज भी अद्वितीय हैं। किताबें हमें सिखाती हैं, प्रेरित करती हैं, मनोरंजन करती हैं और अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और पीढ़ियों से जोड़ती हैं। किताबों को सभी उम्र के लोगों के लिए ज़्यादा आसान बनाना, विश्व पुस्तक व कॉपीराइट दिवस का उद्देश्य पढ़ने की आदत को प्रोत्साहन देना, प्रकाशन व साहित्य संस्कृति को आगे बढ़ाना, बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता निर्माण करना, साथ ही समाज के प्रत्येक पाठक के लिए पुस्तकों तक सहज उपलब्धता लाना मुख्य उद्देश्य हैं। पुस्तकें कल्पना और सर्जनशीलता विकसित कर भाषा और संवाद कौशल बेहतर बनाती है, संस्कृति और इतिहास का जतन करके अलग-अलग पीढ़ियों के पाठकों को आपस में जोड़ती है, साथ ही शिक्षा और ज़िंदगी भर सीखने में मदद करती हैं। नियमित पाठन से शब्दसंग्रह, एकाग्रता, आत्मविश्वास और विचारशक्ती कौशल बेहतर होती हैं।

किताबों की ताकत का जश्न मनाने का दिन

आज “विश्व किताब दिवस” किताबों की खुशी और ताकत का जश्न मनाने का एक शानदार मौका हैं। पसंदीदा एक नई किताब पढ़कर, पुस्तकालयों को भेट देकर, दोस्तों रिश्तेदारों या परिचितों से किताबों का आदान-प्रदान करके अथवा किसी में पढ़ने की ललक जगाकर यह दिन मनाया जाना चाहिए। अपनी पसंदीदा पुस्तकों के बारे में अन्य लोगों या मित्रों से विचार-विमर्श करना चाहिए, हमें यह पुस्तक क्यों पसंद है एवं अन्य पाठकों को भी यह पुस्तक क्यों पढ़नी चाहिए इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर वह पुस्तक पढ़ने के लिए उत्सुक हों। अच्छी किताबों को हमेशा प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि योग्य किताबें पाठकों तक आसानी से पहुंच सकें, जो मनुष्य किताबों से दोस्ती करता है, उसे सफलता के मार्ग पर अग्रसर होने से कभी कोई रोक नहीं सकता, किताबों में समस्या का समाधान छुपा होता हैं। किताबें कभी कोई शिकायत नहीं करती, वें बस निरंतर ज्ञान की गंगा बहाते चलती हैं। जिसने उसे अपनाया जो सवर गया, जिसने किताबों की महत्ता नहीं समझी वो पिछड़ गया।

इंटरनेट के जमाने में पुस्तकें भी डिजिटल

आज के इंटरनेट के जमाने में पुस्तकों का स्वरूप डिजिटल हुआ है, एक क्लिक पर पुस्तकें हमें सहज उपलब्ध हो जाती है, अर्थात पुस्तकों तक सहज पहुंच होने के बावजूद आज पाठ्य संस्कृति कमजोर होती नजर आती हैं। देश गुणवत्ताहीन डिग्रीधारी युवाओं को बनाने की फैक्ट्री बन गया है, जो साल दर साल बेरोजगारी की बाढ़ लाता हैं। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया की गिरफ्त में फंसती जा रही है, पढाई के नाम पर किताबों के बजाय शॉर्टकट नोट्स पर आधारित रहना पसंद करते हैं। लेकिन ये शॉर्टकट नोट्स विद्यार्थियों को केवल कुछ सवालों के मर्यादित जवाब प्रदान करते है और सिर्फ नाममात्र की पदवी प्राप्त करने में सहयोगी है, परंतु विषय के गहन ज्ञान की बात करे या जीवन के हर पड़ाव पर उस ज्ञान के महत्ता पर बात करे तो यही विद्यार्थी फिसड्डी साबित होते है, क्योंकि युवाओं ने गहन ज्ञान रूपी किताबों की महत्ता को न समझा, न पढ़ा कभी। ऐसे माहौल में जब जीवन की परिस्थितियां असंगत या मुश्किलों का दौर आता है तो मनुष्य डगमगाता है, समस्याओं को आसानी से हल करने के बजाय उससे भागता है, जिसके कारण हताशा, आत्महत्या, अपराध और नशाखोरी की समस्याओं का तेजी से जन्म होता है और जीवन में समस्याओं का अंबार लग जाता हैं। किताबें हर मुश्किल में साथ निभाते है, जिसने इन्हें जान लिया वें फिर किसी समस्या में फसते नहीं है क्योंकि सफलता उनके कदम चूमती हैं। सबसे पहले किताबें पढ़ने की आदत डालें, समय का सदुपयोग करें, ज्ञानी और जागरूक बने एवं जीवनभर किताबों से दोस्ती निभाओं, फिर किताबें हमेशा हमारा साथ निभाएंगे। यह एक सुखी, संतुष्ट और सफल जीवन जीने का बहुत आसान तरीका हैं।

-डॉ. प्रितम भि. गेडाम

 

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