इंटरनेशनल डेस्क: भारत, श्रीलंका, नेपाल और रूस सहित नौ देशों के बौद्ध जगत के कुल 19 प्रतिनिधियों ने शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में स्थित प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल ने विश्वप्रसिद्ध पोताला महल, जोखांग मंदिर, नोर्बुलिंगका तथा शीत्सांग संग्रहालय जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण किया।
दक्षिण कोरिया के बौद्ध प्रतिनिधि ली चांगयुप ने यात्रा के उपरांत मीडिया से बातचीत में कहा कि यह उनका ल्हासा का पहला दौरा था। उन्होंने पोताला महल की भव्यता और सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी अत्यंत ऊंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने देश लौटने के बाद वे इस स्थल के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जानकारी देंगे।
भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता स्थित बौद्ध मंदिर के मठाधीश अरमन अरुणज्योति ने बताया कि उन्होंने पोताला महल का दौरा किया और वहां जीवित बुद्ध परंपरा तथा उनके उपदेशों के संरक्षण से संबंधित जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जोखांग मंदिर में स्थापित शाक्यमुनि बुद्ध और अवलोकितेश्वर बोधिसत्व की प्रतिमाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ साष्टांग प्रणाम करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया।
लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के कन्फ्यूशियस कॉलेज के नेपाली पक्ष के अध्यक्ष कुमार ने यात्रा के बाद कहा कि उन्होंने आज एक वास्तविक शीत्सांग को देखा, जो आधुनिकता और परंपरा का संतुलित रूप प्रस्तुत करता है। उनके अनुसार, विश्व के विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां आते हैं, जिससे यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)
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