मेरी पहली चीन यात्रा एक ऐसा अनुभव रही, जिसने मेरी सोच और दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया। एक ऐसे देश को करीब से देखने का मौका मिला, जिसे दुनिया आज विकास, आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के प्रतीक के रूप में देखती है। चीन पहुंचते ही जो पहली चीज ध्यान खींचती है, वह है वहां का सुव्यवस्थित और तेजी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर। मैं चीन की प्रमुख मीडिया एजेंसी CCTV से पिछले 8 वर्षों से एक वीडियो पत्रकार के रूप में जुड़ा हुआ हूं, हालाकि मुझे चीन के विकास को जानने का अवसर चीन के बाहर अन्य देशों में मिलता रहा है परंतु चीन में किस तरह का विकास हुआ है यह अवसर मुझे मेरी पहली चीन यात्रा के दौरान मिला और सच मानिए यह अनुभव हैरान करने वाला है।
इस यात्रा में मैं भारत के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 13 लोगो के दल में शामिल हुआ। इस यात्रा का आयोजन चाइनीज एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग CAIU की तरफ़ से किया गया था जिसका उद्देश्य भारत-चीन में आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इस यात्रा में हेनान प्रांत (झेंगझोउ और लुओयांग), पेइचिंग, शनचन और क्वांग च्यो सहित प्रमुख क्षेत्रों का भ्रमण शामिल था। इस यात्रा का उद्देश्य आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, स्थिरता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में आपसी समझ को बढ़ाना था।
यूँ तो इस यात्रा में कई अनुभव हैं जो मुझे अचंभित करते हैं पर मैं कुछ प्रमुख बातें ही आपको बताता चाहता हूँ इनमें से भी सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली चीज़ थी चीन की हाई-स्पीड ट्रेन प्रणाली। यहां की ट्रेनें न केवल समय की पाबंद हैं, बल्कि उनकी गति और आराम भी अद्भुत है। 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चलने वाली ये ट्रेनें यात्रा को बेहद आसान और सुविधाजनक बना देती हैं। स्टेशन की साफ-सफाई और प्रबंधन भी किसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कम नहीं लगता। लुओयांग से पेइचिंग का आरामदायक और तेज रफ़्तार सफ़र मुझे हमेशा याद रहेगा।
अपनी पहली यात्रा में सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात थी वहाँ के लोगों का व्यवहार। मेट्रो में लंबी कतारें, बिना धक्के-मुक्की के चढ़ना-उतरना, वृद्धों व बच्चों के लिए सीट छोड़ना, और बिना शोर के यात्रा करना। लोग सड़कों पर सिग्नल का पालन करते हैं, सार्वजनिक जगहों पर आवाज़ धीमी रखते हैं, और किसी भी व्यक्ति की सहायता को तुरंत आगे आते हैं। यह सभ्यता स्वाभाविक लगती है, मजबूरन नहीं।
हड़ताली बात यह थी कि इतनी बड़ी आबादी के बावजूद सड़कें बेहद साफ थीं। सार्वजनिक शौचालय न सिर्फ़ साफ़, बल्कि हाई-टेक थे। कूड़ेदानों पर इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन भी देखी। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर जगह ई-वाहन, सोलर पैनल, और भवनों पर हरियाली। पार्कों में छोटे-छोटे तालाब, वहाँ तैरते बत्तख और घूमती मछलियाँ – मानो शहर के बीच एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र। बात करें अगर आर्किटेक्चर की तो इसके कहने ही क्या, आधुनिक इमारतें जैसे पेइचिंग के CCTV मुख्यालय, शांगहाई के टॉवर, या शनचन के स्काईलाइन – मानो आकाश को चुनौती दे रहे हों। वहीं दूसरी ओर, प्राचीन मंदिर, फॉरबिडन सिटी, शान से खड़ी ग्रेट वाल और पारंपरिक हुटोंग्स (गलियाँ) आज भी अपनी सांस्कृतिक गौरव को संजोए हुए हैं। पुराने और नए का संगम देखते ही बनता था।
हमारे प्रतिनिधिमंडल ने BYD (इलेक्ट्रिक वाहन) और AION कार निर्माण इकाई सहित प्रमुख औद्योगिक संयंत्रों का दौरा किया और हरित गतिशीलता, उन्नत विनिर्माण और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में चीन के नेतृत्व की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की। उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत से पता चला कि चीनी उद्यमों को सब्सिडी, बुनियादी ढांचे और वित्तपोषण तंत्र के माध्यम से सरकार का मजबूत समर्थन प्राप्त है, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल कर रहे हैं। इस यात्रा में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा, आईटी, फार्मास्युटिकल और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में चीन की बढ़ती रुचि पर भी प्रकाश डाला गया।
वेइपो गाँव (लुओयांग) में हमारे प्रतिनिधिमंडल ने मशीनीकरण, स्मार्ट कृषि पद्धतियों और खाद्य सुरक्षा रणनीतियों के माध्यम से चीन के कृषि आधुनिकीकरण का अवलोकन किया, जिससे ग्रामीण विकास के लिए बहुमूल्य सीख प्राप्त हुई। प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित स्थानों का दौरा करके सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान में भाग लिया: श्वेत अश्व मंदिर (बौद्ध धरोहर), लॉन्गमेन गुफाएँ (यूनेस्को धरोहर स्थल), झेंगझोऊ विश्वविद्यालय (छात्र एवं विशेषज्ञ संवाद)। इन गतिविधियों ने लोगों के बीच आपसी संबंधों और अंतर-सांस्कृतिक समझ को मजबूत किया।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में आपसी सम्मान, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में साझा हित पर जोर दिया गया। शनचन और क्वांग च्यो में प्रतिनिधिमंडल ने स्मार्ट शहर के बुनियादी ढांचे, शहरी नियोजन और प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक विकास मॉडल में हो रहे नवीनतम विकासों का अवलोकन किया। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में चीन के प्रयास भी सराहनीय हैं। बड़े पैमाने पर हरियाली बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स इसका उदाहरण हैं।
कुल मिलाकर, चीन की यह यात्रा केवल एक पर्यटन अनुभव नहीं थी, बल्कि यह समझने का मौका था कि कैसे एक देश योजना, अनुशासन और तकनीक के बल पर इतनी तेज़ी से आगे बढ़ सकता है। यह यात्रा मेरे लिए प्रेरणादायक रही और विकास की एक नई परिभाषा समझाने वाली साबित हुई। चीन की पहली यात्रा ने मुझे सिखाया कि विकास केवल ऊँची इमारतों में नहीं, बल्कि नागरिकों के अनुशासन, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता में भी होता है। यहाँ हर कोई – छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक – नियमों का पालन करते हैं। यह अनुभव नेत्र खोलने वाला था। लौटते समय लगा, काश हम भी उनसे ये अच्छी आदतें और पर्यावरणीय चेतना जरूर सीख पाते। अंत में मैं आशा करता हूँ कि मुझे बार-बार चीन की यात्रा करने का अवसर मिले ताकि मैं नई चीज़े सीख सकूँ और अपने देश भारत के विकास के लिए अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान दे सकूँ।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)