अंबाला। प्रदेश के साथ-साथ देशभर में नीट यूजी 2026 का पेपर काफी आसान रहा। ये बात परीक्षा देने वाले अधिकतर स्टूडेंट्स की जुबान पर था। परीक्षा देकर ये लोग अब फ्री हो गए हैं। अब इनके मन में एक ही सवाल है कि इस बार कट ऑफ क्या रहेगी।
स्टूडेंट्स के मन में कट ऑफ का विचार आना गलत नहीं बल्कि वाजिब भी है। इसी कट ऑफ के बेस पर उनको एडमिशन भी मिलना है। यही कट ऑफ निर्धारित करेगी कि उन्हें कौन सी यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलेगा। उनकी पढ़ाई में आने वाला खर्च क्या रहेगा। आईये इस विषय में आपके मन में उठ रहे सवालों में हम भी शामिल होते हैं और चर्चा करते हैं इस विषय पर। हो सकता है इस चर्चा से आपको कुछ फायदा हो।
देशभर में आयोजित NEET के लिए शिक्षा विशेषज्ञ ने बताया कि इस वर्ष का पेपर पिछले साल की तुलना में थोड़ा आसान था। उन्होंने बताया कि पेपर पूरी तरह से NCERT स्तर के अनुरूप था। बायोलॉजी विषय में लगभग सभी प्रश्न NCERT से ही पूछे थे, जिससे उन छात्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है जिन्होंने अपनी तैयारी NCERT पर आधारित की थी। ऐसे विद्यार्थियों के बेहतर परिणाम आने के पूरे आसार हैं।
कट-ऑफ के लिए परीक्षा के कठिन या आसान होने का सीधा असर कट-ऑफ पर पड़ता है। जब पेपर कठिन होता है तो कट-ऑफ नीचे जाती है, जबकि आसान पेपर में कट-ऑफ बढ़ जाती है। इस बार पेपर पहले के मुकाबले आसान होने के कारण कट-ऑफ 600 से 610 अंकों के बीच रहने का अनुमान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम कट-ऑफ और प्रवेश प्रक्रिया का निर्धारण मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की ओर से किया जाता है। ये हर वर्ष उच्च स्तर के विद्यार्थियों का चयन सुनिश्चित करती है। चाहे चयन प्रक्रिया 720 अंकों से शुरू हो या 650 से, मेरिट के आधार पर ही योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलता है।
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