Last Updated: October 1, 2026

Dainik Savera Times Logo

राजस्थान: 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी को किया गिरफ्तार

May 7, 2026

राजस्थान: 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी को किया गिरफ्तार

नेशनल डेस्क: राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े कथित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई गुरुवार सुबह जयपुर में की गई। एसीबी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सुबह-सुबह जयपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित सन कॉलोनी में महेश जोशी के घर पर छापा मारा। अधिकारियों ने वहां पूछताछ की और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।

पहले ईडी भी कर चुकी है कार्रवाई

इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। उस दौरान उन्हें करीब सात महीने जेल में रहना पड़ा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसंबर 2025 को उन्हें जमानत दे दी थी। अब एसीबी ने भ्रष्टाचार और टेंडर घोटाले की जांच के तहत फिर से कार्रवाई की है।

ये भी पढ़ें: भारत में शुरू हुई Mini Cooper S GP Inspired Edition की बुकिंग, मात्र इतने पैसे देकर करें बुक

क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से पानी पहुंचाना है। राजस्थान में इसी योजना के तहत जारी किए गए कई टेंडरों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने का आरोप है।, जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ कंपनियों को नियमों के खिलाफ फायदा पहुंचाया गया। आरोप है कि पसंदीदा कंपनियों को टेंडर दिलाने के बदले रिश्वत ली गई, जांच में सामने आया है कि श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल नाम की कंपनियों ने कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जमा किए थे। बताया जा रहा है कि ये प्रमाण पत्र IRCON इंटरनेशनल के नाम पर तैयार किए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके दिए गए।

900 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले का आरोप

एसीबी के अनुसार, इस मामले में 900 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका है। आरोप है कि श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब 859.20 करोड़ रुपये के ठेके हासिल किए। वहीं श्री श्याम ट्यूबवेल को लगभग 120.25 करोड़ रुपये के टेंडर मिले, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि टेंडर प्रक्रिया में किन अधिकारियों और नेताओं की भूमिका रही।

जांच के घेरे में कई अधिकारी और इंजीनियर

इस मामले में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुबोध अग्रवाल को भी पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तक इस घोटाले में 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसीबी ने साल 2024 में कुल 22 अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इनमें वित्तीय सलाहकार, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कई अन्य अधिकारी शामिल हैं, जांच के दायरे में आए प्रमुख नामों में सुनील शर्मा, रामकरण मीणा, दिनेश गोयल, अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, निरेल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और विशाल सक्सेना शामिल हैं।

ये भी पढ़ें: बंगाल में चुनाव बाद हिंसा तेज: पानीहाटी में एक के बाद एक तीन बम धमाके, 5 भाजपा कार्यकर्ता घायल

तीन आरोपी अभी भी फरार

एसीबी के अनुसार इस मामले में तीन आरोपी अभी तक फरार हैं। अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया है, जांच एजेंसी अब उनकी संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटा रही है। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही कोर्ट की अनुमति के बाद उनकी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी। एसीबी और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। राजस्थान की राजनीति में भी इस कार्रवाई के बाद हलचल तेज हो गई है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें