Last Updated: November 6, 2026

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बिस्त दोआब नहरी नेटवर्क के तहत वर्ष 2025-26 में सिंचाई क्षेत्र में 167% वृद्धि

May 14, 2026

बिस्त दोआब नहरी नेटवर्क के तहत वर्ष 2025-26 में सिंचाई क्षेत्र में 167% वृद्धि

चंडीगढ़ : पंजाब की ऐतिहासिक जीवनरेखा मानी जाने वाली बिस्त दोआब नहर के पुनर्जीवन ने दोआबा क्षेत्र के खेतों, किसानों और भविष्य को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा किए गए योजनाबद्ध प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 के दौरान बिस्त दोआब नहरी नेटवर्क के अंतर्गत सिंचाई क्षेत्र में 167% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि के साथ 1,10,762 एकड़ अतिरिक्त भूमि को नहरी सिंचाई के दायरे में लाया गया है, जिससे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

दोआबा की जीवनरेखा मानी जाने वाली इस नहर में जल प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्य किए हैं। इन प्रयासों के चलते जालंधर, शहीद भगत सिंह नगर, कपूरथला तथा होशियारपुर के कुछ हिस्सों में लंबे समय से बनी पानी की कमी को काफी हद तक दूर किया गया है और सिंचाई व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। रोपड़ हेडवर्क्स से निकलने वाले इस नहरी नेटवर्क, जिसमें इसकी शाखाएं, माइनर और खाल शामिल हैं, का व्यापक स्तर पर पुनरुद्धार किया गया है। इससे पानी के वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप सिंचाई के तहत आने वाले क्षेत्र में बड़ा विस्तार हुआ है।

इस पुनर्जीवन अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि बिस्त दोआब नहर नेटवर्क के अंतर्गत लगभग 19,213 एकड़ कृषि भूमि को पहली बार नहरी पानी उपलब्ध हुआ है। इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिली है, जो अब तक केवल भूमिगत जल और बारिश पर निर्भर थे। जल प्रवाह में सुधार का सकारात्मक प्रभाव बलाचौर क्षेत्र की काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना पर भी पड़ा है। वहीं शहीद भगत सिंह नगर के बंगा और मुकंदपुर तथा जालंधर जिले के अपरा, नूरमहल, मलसियां, नकोदर, आदमपुर और कालासंघियां जैसे क्षेत्रों में सिंचाई ढांचे को मजबूत किया गया है। जालंधर ब्रांच से जुड़े पुनर्जीवित रजवाहों ने अंतिम खेत तक पानी पहुंचाने की क्षमता को और बेहतर बनाया है।

नहर के पुनर्जीवन का लाभ अब शहरी क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है। जालंधर शहर में पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए जालंधर ब्रांच को अतिरिक्त 150 क्यूसेक पानी आवंटित किया गया है। इससे नगर निगम की भूमिगत जल पर निर्भरता कम होगी और शहर को अधिक टिकाऊ एवं भरोसेमंद जल आपूर्ति प्रणाली उपलब्ध हो सकेगी। बिस्त दोआब नहर की यह बहाली पंजाब सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत सिंचाई तंत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है, किसानों को मजबूत किया जा रहा है और जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा रहा है।

यह पहल न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। नहरों के पुनर्जीवन की यह सफल कहानी पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था, किसानों की समृद्धि और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है।

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