
सोनीपत। मुरथल क्षेत्र में एक बीयर फैक्ट्री से निकला रहा केमिकल युक्त पानी पेड़ों का दुश्मन बन गया है। इससे हजारों पेड़ सूख गए हैं और क्षेत्र की हरियाली खत्म हो रही है। इस पानी में बह रहे जहर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां यह जाता है वहीं बंजर है। दूसरी जगह पेड़ हरे हैं।
लोगों का कहना है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी लगातार सरकारी जमीन और आसपास के क्षेत्रों में छोड़ा जा रहा है। इससे पशु बीमार पड़ रहे हैं और भूजल भी खराब हो रहा है। लोगों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का डर बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने जांच की।
इस बारे में विभाग के अधिकारी अजय मलिक ने कहा कि NS-4 नाम की बीयर फैक्ट्री की दीवार के नीचे से केमिकल युक्त पानी लीक होकर फॉरेस्ट की जमीन तक पहुंच रहा था। इस कारण ग्रीन बेल्ट में लगे पेड़-पौधे खराब हुए हैं। विभाग ने इसे गंभीर पर्यावरणीय लापरवाही मानते हुए फैक्ट्री को जिम्मेदार ठहराया है।
मामले में प्रदूषण विभाग ने कार्रवाई करते हुए NS-4 बीयर फैक्ट्री पर 39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि फैक्ट्रियों के केमिकल वेस्ट की नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं और प्रभावित क्षेत्र में दोबारा पौधारोपण कराया जाए।
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