Last Updated: October 13, 2026

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आंखों की थकान और शरीर के घटते लचीलेपन से राहत दिला सकता है मत्स्यासन

May 25, 2026

आंखों की थकान और शरीर के घटते लचीलेपन से राहत दिला सकता है मत्स्यासन

विश्व योग दिवस में अब मात्र 28 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय रोजाना एक-एक योगासन के अभ्यास और उसके फायदों की जानकारी दे रहा है। इसी कड़ी में मंत्रालय ने मत्स्यासन के बारे में विस्तार से बताया है।

मंत्रालय के अनुसार, आंखों में खिंचाव, गले में बेचैनी, पीठ में अकड़न और शरीर का संतुलन व लचीलापन खत्म होना जैसे आम समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए मत्स्यासन का नियमित अभ्यास बहुत उपयोगी है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली, ज्यादा स्क्रीन टाइम और गलत मुद्रा में बैठने की आदत के कारण कई लोग इन छोटी-छोटी परेशानियों से जूझ रहे हैं। ये संकेत शरीर को लचीलापन और संतुलन बहाल करने की जरूरत बता रहे हैं। मत्स्यासन इन्हीं समस्याओं का प्राकृतिक समाधान है।

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि मत्स्यासन गले, छाती और कंधों को अच्छी तरह खोलता है। इससे गले की मांसपेशियों में बेचैनी कम होती है और थायरॉइड ग्लैंड भी स्वस्थ रहता है। आंखों के आसपास की मांसपेशियों पर पड़ने वाला खिंचाव दूर होता है। पीठ की अकड़न कम होकर कमर और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बना रहता है और लचीलापन बढ़ता है। यह आसन श्वास संबंधी समस्याओं में भी राहत देता है और मन को शांत रखने में मदद करता है।

मत्स्यासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं और हाथों को शरीर के साथ व हथेलियों को नीचे की ओर करके कूल्हों के पास रखें। इसके बाद कोहनियों को जमीन पर टिकाते हुए छाती को ऊपर की ओर उठाएं। सिर को पीछे की ओर झुकाएं ताकि सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छू सके। फिर पैर सीधे या कमलासन की मुद्रा में रख सकते हैं। सामान्य सांस लेते हुए 15-30 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें।

मत्स्यासन जैसा आसान लेकिन प्रभावी आसन घर पर ही किया जा सकता है और यह आधुनिक जीवन की छोटी-बड़ी शारीरिक परेशानियों से राहत दिलाने में कारगर साबित होता है।नियमित अभ्यास से न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि मन भी प्रसन्न और ऊर्जावान रहेगा। हालांकि, कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी है।

गर्दन या पीठ की गंभीर समस्या वाले लोग डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इस आसन का अभ्यास करें। गर्भवती महिलाओं को भी सतर्कता बरतनी चाहिए।

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