Last Updated: September 27, 2026

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”नो PUCC, नो फ्यूल’ नियम लागू करेगा सरकार’, NCR में प्रदूषण 35% तक कम करने का लक्ष्य

June 3, 2026

”नो PUCC, नो फ्यूल’ नियम लागू करेगा सरकार’, NCR में प्रदूषण 35% तक कम करने का लक्ष्य

No PUCC, No Fuel rule: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर निर्णायक प्रहार की तैयारी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के दौरान प्रदूषण स्तर में 30 से 35 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों के खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा, जबकि 1 अक्टूबर से एनसीआर के सभी पेट्रोल पंपों पर ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने दिए ये निर्देश 

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सुधार और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभिन्न विभागों की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। बैठक में उन्होंने सभी विभागों को समन्वित और परिणामोन्मुख कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी वेस्ट), हरित आवरण विस्तार और पराली प्रबंधन जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। साथ ही आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

बैठक में बताया गया कि ‘नया सफर’ योजना के तहत एनसीआर के चार जिलों में 26.19 लाख एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों की पहचान की गई है। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 पुराने वाहनों को स्क्रैप किया गया, जबकि 460 वाहनों को जब्त किया गया है। आगामी अक्टूबर से लागू होने वाली ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था के लिए एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएंगे। स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में इन शहरों में 100 ई-बसें संचालित हो रही हैं। वायु गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए एनसीआर-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 43 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से 25 स्टेशन पहले से संचालित हैं, जबकि शेष 18 स्टेशन अक्टूबर 2026 तक स्थापित किए जाएंगे।

3,666 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान

औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के तहत 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है। इनमें से 613 इकाइयों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) स्थापित कर उन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जोड़ा जा चुका है। वहीं, 665 उद्योगों में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (एपीसीडी) लगाने की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिनमें चरणबद्ध तरीके से स्थापना का कार्य जारी है। सड़क धूल पर नियंत्रण के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास की योजना पर काम चल रहा है।

इस परियोजना पर लगभग 3,666 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। अब तक 143.8 किलोमीटर सड़क पुनर्विकास कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा यांत्रिक सड़क सफाई को प्रभावी बनाने के लिए 108 रोड स्वीपिंग मशीनों की आवश्यकता आंकी गई है, जिनमें से 50 मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है।

कई परियोजनाओं की समीक्षा की गई

बैठक में निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरा निस्तारण, पौधारोपण, पराली प्रबंधन, सीबीजी संयंत्रों की स्थापना, ईवी चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, मेट्रो और आरआरटीएस विस्तार समेत कई परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी के लिए विभिन्न पोर्टलों, मोबाइल एप, जीपीएस ट्रैकिंग और डैशबोर्ड को जोड़कर एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने और नियमित समीक्षा के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि एनसीआर में स्वच्छ हवा और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

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