Last Updated: November 5, 2026

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टीएमसी का अस्तित्व और ममता के आवास पर विधायकों की बैठक

June 5, 2026

टीएमसी का अस्तित्व और ममता के आवास पर विधायकों की बैठक

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय राजनीतिक चुनौतियों के दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी को आंतरिक कलह भी झेलनी पड़ रही है।

बैठक के लिए विधायकों को किया फोन

पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee संगठन को एकजुट रखने और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति में अपनी भूमिका बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। संसद में टीएमसी की मौजूदगी बरकरार है, लेकिन बंगाल की राजनीति में अपना प्रभाव फिर से मजबूत करना पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में आई बड़ी टूट को रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सक्रिय हो गई हैं। ममता ने कई बागी विधायकों से व्यक्तिगत रूप से फोन पर संपर्क किया है और उन्हें फिर से पार्टी के साथ आने का आग्रह किया है। ममता की उनके विधायकों से फोन पर क्या बात हुई। इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है। पार्टी के 58 बागी विधायकों ने विधानसभा में तृणमूल के परिषदीय दल पर नियंत्रण स्थापित करते हुए निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया। विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने भी उन्हें मान्यता दे दी है। ममता ने आज अपने निवास पर विधायकों की बैठक बुलाई है।

पिछली बैठक में अनुपस्थित रहे थे अधिकतर

माना जा रहा है कि इसी बैठक में शामिल होने का आग्रह करने के लिए उन्होंने विधायकों से संपर्क किया। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने विधायक पहुंचेंगे। इससे पहले भी ममता की बुलाई बैठक में बड़ी संख्या में विधायक अनुपस्थित रहे हैं। बागी खेमे ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को 58 विधायकों के साथ बैठक की। ममता के सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौती बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा संकट सामने है। ममता बनर्जी के सामने फिलहाल पहला विकल्प कानूनी लड़ाई का है। वह विधानसभा अध्यक्ष की ओर से ऋतब्रत को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दिए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकती हैं।

20 रह सकती है विधायकों की संख्या

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने ये संकेत भी दिए हैं। आमतौर पर संसदीय मामलों में अदालतें सीधे हस्तक्षेप नहीं करतीं, लेकिन अतीत में कई मामलों में अध्यक्ष के फैसलों की न्यायिक समीक्षा हुई है। दूसरा विकल्प बागी विधायकों को पार्टी से निष्कासित करने का है। यदि ऐसा होता है तो तृणमूल के विधायकों की संख्या घटकर लगभग 20 रह जाएगी और पार्टी प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा भी खो सकती है। इसके बाद बागी विधायक चुनाव आयोग के पास जाकर स्वयं को असली तृणमूल बताकर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग पूरे मामले की जांच करेगा। केवल विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि सांसदों, संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों और पार्टी संरचना में समर्थन का भी आकलन किया जाएगा। आयोग सभी पक्षों की राय लेकर तय करेगा कि वास्तविक तृणमूल किसे माना जाए।

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