इंटरनेशनल डेस्क: चीन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों की सतत यात्रा का परिणाम है, जो चीनी जीवन, लोक-आस्था और उत्सवों में अद्भुत विविधता लाती है। प्राचीन और गौरवशाली परंपराओं से संपन्न यह राष्ट्र अनेक पारंपरिक त्योहारों का जनक है, जो आधुनिक युग में भी अपनी भव्यता, जीवंतता और सांस्कृतिक महत्व को पूरी ऊर्जा के साथ संजोए हुए हैं। गहरे सांस्कृतिक अर्थ और लंबे इतिहास से जुड़े ये त्योहार चीनी सभ्यता के अभिन्न और शानदार अंग हैं।
इस सप्ताह चीन में ड्रैगन बोट फेस्टिवल, जिसे तुआन वू चिए (Duan Wu jie) त्योहार भी कहा जाता है, मनाया जा रहा है। चीनी चंद्र कैलेंडर के पांचवें महीने की पांचवीं तिथि को यानी इस वर्ष 19 जून को पड़ने वाले इस पर्व के लिए देश भर में उत्साह है। लोग नौका दौड़, लोक नृत्य, प्रसिद्ध शेर नृत्य और पारंपरिक व्यंजन चूंग ची (zong zi) का आनंद लेने को तैयार हैं। चीन में जन्मा यह त्योहार अब उन सभी देशों में लोकप्रिय हो रहा है जहाँ चीनी प्रवासी समुदाय बसा है। यह त्योहार चीनी लोगों के लिए मातृभूमि के प्रति प्रेम और उज्ज्वल भविष्य की आशा व्यक्त करने का अवसर है।
छु युआन की गाथा: त्योहार की जड़ में देशभक्ति
हालांकि, जब चीनी लोग ड्रैगन बोट रेसिंग के साथ अपना यह प्राचीन त्योहार मनाते हैं, तो इसके पीछे एक सच्ची और मार्मिक ऐतिहासिक कथा जुड़ी है। कथा इस प्रकार है: छु युआन (Qu Yuan, 340–278 ईसा पूर्व) युद्धरत राज्य काल (Warring States Period, 475–221 ईसा पूर्व) के दौरान दक्षिणी छु राज्य (Chu State) में एक प्रतिभाशाली कवि और उच्च मंत्री थे। छु के राजा दरबारी मंत्रियों के प्रभाव में आ गए, जिन्होंने छु युआन की निंदा की और उन्हें ‘राजा की आंखों का कांटा (a sting in the flesh)’ कहा। अंततः राजा ने अपने वफादार सलाहकार को राज्य से निर्वासित कर दिया।
निर्वासन के दौरान उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से मातृभूमि के प्रति अपने अटूट प्रेम और उसके भविष्य के प्रति गहरी चिंता को व्यक्त किया। देशभक्ति से ओतप्रोत छु युआन ने निराश होकर मील्वो (Miluo) नदी में आत्म-विसर्जन कर लिया। उनकी स्मृति में स्थानीय लोगों ने नदी में चूंग ची बांस या नरकुल के पत्तों में लिपटे चावल और भरावन के पैकेट प्रवाहित किए, ताकि मछलियां उनके पार्थिव शरीर को हानि न पहुंचाएं। आज ये रीति-रिवाज ड्रैगन बोट दौड़ की लय, शक्ति और सामूहिक भावना में जीवित हैं, जो चीनी समाज के लिए हर्ष और एकता का उत्सव बन गए हैं।
सांस्कृतिक मान्यता और वैश्विक विस्तार
चीन ने 2006 में अपनी पहली राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची जारी की और ड्रैगन बोट फेस्टिवल उसी वर्ष इसमें शामिल किया गया। सितंबर 2009 में यूनेस्को ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया। यह सम्मान पाने वाला यह पहला चीनी त्योहार था।
आज ड्रैगन बोट रेस एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी खेल बन चुकी है। इसे टोक्यो 2020 ओलंपिक में प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया था। उल्लेखनीय है कि चौथा आईडीबीएफ विश्व कप (International Dragon Boat Federation) अक्टूबर 2024 में ड्रैगन बोट रेसिंग की जन्मस्थली, हुनान प्रांत की मील्वो नदी पर आयोजित हुआ। 2008 से यह त्योहार चीन में राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश है।
तीन दिवसीय उत्सव में 2,000 साल पुरानी परंपराएं निभाई जाती हैं: चूंग ची खाना, नौका दौड़, शियोंग हुआंग (Xiong Huang) वाइन पीना, सुगंधित थैली और पांच रंग का रेशमी धागा पहनना, द्वार पर मोक्सा और कैलमस लटकाना और खिड़कियों पर कागज़ की कलात्मक कटाई सजाना। ये परंपराएं चीनी संस्कृति की जीवंतता और समय के साथ ढलने की क्षमता को दर्शाती हैं।
सॉफ्ट पावर और जन-कूटनीति
एक वैश्विक शक्ति के रूप में चीन अपनी परंपराओं, मूल्यों और भाषा को विदेशों में बढ़ावा देकर अपनी राष्ट्रीय छवि को सशक्त कर रहा है। ड्रैगन बोट फेस्टिवल आज जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम से लेकर यूरोप और अमेरिका तक मनाया जाता है।
भारत में कोलकाता जहां देश का सबसे बड़ा चीनी प्रवासी समुदाय रहता है। इस त्योहार का प्रमुख केंद्र बन गया है। हर साल यहाँ नौका दौड़, शेर नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक भोजन के साथ यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
पिछले कुछ वर्षों से कोलकाता स्थित चीन के महावाणिज्य दूतावास और इंडिया-चाइना कल्चरल डेवलपमेंट एसोसिएशन कोलकाता में ड्रैगन बोट रेस का आयोजन करते आ रहे हैं, जिससे भारत-चीन मैत्री को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।
संस्कृति से अर्थव्यवस्था तक
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और जीवन स्तर में सुधार के साथ, त्योहारों के दौरान यात्रा करना चीन में आधुनिक रिवाज बन गया है। तीन दिन का ड्रैगन बोट अवकाश परिवार के साथ समय बिताने और तनाव मुक्त होने का सुनहरा अवसर देता है।
संस्कृति की निरंतरता का प्रतीक
आधुनिकीकरण और जीवनशैली में बदलावों के बावजूद, ड्रैगन बोट फेस्टिवल अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ आज भी चीनी लोगों के लिए प्रेम और एकता का प्रतीक बना हुआ है। यह सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जिसे वे पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। यह त्योहार न केवल आंखों को, बल्कि दिल को भी छूता है। इसकी सांस्कृतिक गहराई और जन-भावना दोनों मनमोहक हैं। आज यह पर्व केवल ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि चीन की सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। निस्संदेह, ड्रैगन बोट फेस्टिवल से जुड़ा आनंद, साझापन और सद्भाव का संदेश चीन और बाकी दुनिया के बीच एक बेहतरीन सांस्कृतिक सेतु का काम कर रहा है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)
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