Farmers roar in Chandigarh : चंडीगढ़। अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील (FTA) के लिए देशभर के किसान संगठनों में उबाल बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की इस संभावित व्यापारिक पहल के खिलाफ किसानों ने मोर्चा खोलने के संकेत दे दिए हैं।
पंजाब किसान भवन में आयोजित एक अहम आपात बैठक में 114 किसान और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि जुटे, जहां अमेरिकी ट्रेड डील को भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके खिलाफ संयुक्त संघर्ष का बिगुल फूंक दिया गया। बैठक की अगुवाई भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने की। इस दौरान संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों के हितों की अनदेखी कर यह समझौता लागू किया, तो देश एक बड़े किसान आंदोलन का साक्षी बन सकता है।
किसान नेताओं ने आशंका जताई कि अगर अमेरिका के साथ यह फ्री ट्रेड डील होती है, तो विदेशी कृषि उत्पादों की भारतीय बाजारों में बेरोकटोक एंट्री हो जाएगी। इससे देश के छोटे और सीमांत किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। चेयरमैन गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश के अन्नदाता के अस्तित्व की है। अच्छी बात यह रही कि इस बैठक में आपसी मतभेदों को दरकिनार कर सभी धड़े और संगठन एक मंच पर आकर संयुक्त मोर्चा बनाने को तैयार दिखे।
बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक के राज्यों की नुमाइंदगी देखी गई। मुख्य रूप से पंजाब के कद्दावर नेता सरवन सिंह पन्धेर, बलबीर सिंह राजेवाल, उत्तर प्रदेश से वीएम सिंह, केरल से बीजू और हरियाणा से युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ शामिल हुए। वहीं जिला यमुनानगर से प्रमुख किसान चेहरा संजू गुंदियाना भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। इनके अलावा उड़ीसा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान संगठनों के मुखियाओं ने भी अपनी हाजिरी लगाई और जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने की वकालत की। (Farmers roar in Chandigarh )
किसान नेताओं ने कहा कि कई ऐसे संगठन हैं जो दूरी, समय की कमी या अन्य अपरिहार्य कारणों से आज की इस आपात बैठक में हिस्सा नहीं ले सके। उन सभी को इस मुहिम से जोड़ने के लिए आगामी पहली जुलाई को चंडीगढ़ के इसी किसान भवन में दोबारा एक बड़ी बैठक मुकर्रर की गई है। किसान नेताओं का दावा है कि पहली जुलाई की बैठक में देश के सभी छोटे-बड़े संगठनों को एक छत्र के नीचे लाकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक निर्णायक और देशव्यापी आंदोलन का बाकायदा शंखनाद कर दिया जाएगा। Farmers roar in Chandigarh
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