Last Updated: September 23, 2026

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‘फैसला पहले ही लिया जा चुका, लोगों को मूर्ख बनाना बंद करो’, राम मंदिर में CEO की नियुक्ति पर भड़के शंकराचार्य 

July 14, 2026

‘फैसला पहले ही लिया जा चुका, लोगों को मूर्ख बनाना बंद करो’, राम मंदिर में CEO की नियुक्ति पर भड़के शंकराचार्य 

लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि CEO पद के लिए निकाली गई वैकेंसी केवल औपचारिकता है और इससे लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।

शंकराचार्य ने कहा कि जब राम मंदिर के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था, तब किसी तरह की खुली भर्ती या आवेदन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। ऐसे में अब CEO के पद के लिए आवेदन आमंत्रित करने का क्या मतलब है? उनका आरोप है कि ट्रस्ट पहले से तय व्यक्ति की ही नियुक्ति करेगा और यह प्रक्रिया सिर्फ दिखावे के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि, “जब ट्रस्ट बनाया गया था तब कोई वैकेंसी नहीं निकाली गई। अब CEO की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर लोगों को यह दिखाया जा रहा है कि प्रक्रिया पारदर्शी है, जबकि फैसला पहले ही लिया जा चुका होगा। यह लोगों को मूर्ख बनाने जैसा है।”

ट्रस्ट को हटाने की मांग

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर ट्रस्ट पर वित्तीय अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस ट्रस्ट पर भगवान राम के खजाने में गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं, उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक मौजूदा ट्रस्ट को हटाकर धर्माचार्यों का नया ट्रस्ट नहीं बनाया जाता और मंदिर की व्यवस्था उन्हें नहीं सौंपी जाती, तब तक हिंदू समाज के मन में संतोष और विश्वास नहीं आएगा।

बयान के बाद फिर तेज हुई बहस

शंकराचार्य के इस बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर संत समाज और धर्म से जुड़े लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोग ट्रस्ट की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग ट्रस्ट के पक्ष में भी अपनी राय रख रहे हैं।

चढ़ावे को लेकर भी उठे सवाल

इसी बीच राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद ने भी मामला और गंभीर बना दिया है। कुछ श्रद्धालुओं और दानदाताओं ने आरोप लगाया है कि मंदिर में दी गई उनकी भेंट की रसीद नहीं दी गई। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि उनके द्वारा दान की गई वस्तुएं मंदिर में न तो प्रदर्शित की गईं और न ही उनके बारे में कोई जानकारी दी गई। इन शिकायतों के बाद ट्रस्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि जिन श्रद्धालुओं की भेंट मंदिर में सुरक्षित रखना संभव नहीं है, उन्हें उनकी वस्तुएं वापस लौटाने का विकल्प दिया जाए।

ट्रस्ट का पक्ष

ट्रस्ट का कहना है कि रामलला के गर्भगृह और मंदिर परिसर में जगह सीमित है, इसलिए सभी श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई वस्तुओं को हमेशा के लिए वहां रखना संभव नहीं है। इसी कारण कुछ भेंट की गई वस्तुओं को वापस करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।फिलहाल, CEO की नियुक्ति प्रक्रिया, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर विवाद जारी है। हालांकि, इन आरोपों पर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

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