
Gandhi’s picture on the note : नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय नोटों पर छपी महात्मा गांधी की तस्वीर आखिर कहां से आई? क्या यह किसी कलाकार की बनाई गई तस्वीर है या फिर किसी ऐतिहासिक फोटो का हिस्सा? आखिर इस तस्वीर को भारतीय मुद्रा के लिए ही क्यों चुना गया? आइए जानते हैं गांधी जी की उस मशहूर तस्वीर की दिलचस्प कहानी, जो हर भारतीय की जेब में मौजूद नोटों पर छपी है।
भारत में पॉलीमर नोट लाने की चर्चाओं के बीच एक बार फिर मुद्रा पर गांधी जी की तस्वीर को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है। इस तस्वीर के पीछे जुड़ी कहानी इतिहास, तकनीक और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी हुई है। भारतीय नोटों पर इस्तेमाल की गई गांधी जी की तस्वीर साल 1946 में खींची गई एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो का हिस्सा है। ये तस्वीर कोलकाता स्थित तत्कालीन वायसराय हाउस में ली गई थी, जिसे आज राजभवन के नाम से जाना जाता है। उस समय महात्मा गांधी ब्रिटिश नेता लॉर्ड फ्रेडरिक विलियम पेथिक-लॉरेंस से मुलाकात करने पहुंचे थे। मूल तस्वीर में गांधी जी अकेले नहीं थे, बल्कि वे पेथिक-लॉरेंस के साथ खड़े होकर मुस्कुरा रहे थे।
बैंक नोट के लिए इसी तस्वीर से केवल गांधी जी की छवि को चुना गया। खास बात ये है कि भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार इस ऐतिहासिक तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर की जानकारी उसके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। नोट पर गांधी जी की तस्वीर लगाने के लिए कई बातों को ध्यान में रखा गया था। इस तस्वीर में गांधी जी का चेहरा बेहद स्वाभाविक और शांत दिखाई देता है। उनकी मुस्कान सादगी, शांति और करुणा जैसे मूल्यों को दर्शाती है। इसके अलावा इस तस्वीर का चयन तकनीकी कारणों से भी किया गया।
इसमें गांधी जी का चेहरा साफ दिखाई देता है, जिससे नोट पर सुरक्षा से जुड़े फीचर्स जैसे वॉटरमार्क और नकली नोटों को रोकने वाली तकनीकों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार महात्मा गांधी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रीय पहचान और देश के मूल्यों का व्यापक रूप से प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी छवि को देश के अलग-अलग हिस्सों और समुदायों में स्वीकार्यता मिली है। भारत जैसे विविधता वाले देश में किसी अन्य ऐतिहासिक व्यक्ति का चयन करने पर क्षेत्रीय या राजनीतिक मतभेद पैदा हो सकते थे। गांधी जी की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्वीकार किया गया।
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