Mirabai Chanu News: भारत की स्टार वेटलिफ्टर और ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। ग्लासगो में मिली इस जीत के साथ मीराबाई 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली खिलाड़ी भी बनीं।
परिवार के सहयोग ने बनाया मजबूत
गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई चानू ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि उनके खेल जीवन में कई बार कठिन परिस्थितियां आईं। उन्हें कई चोटों का सामना करना पड़ा, लेकिन हर मुश्किल समय में उनके परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया और कभी उनका साथ नहीं छोड़ा।
उन्होंने कहा कि मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया है। मुझे कई चोटें लगीं, लेकिन उन्होंने हर समय मेरा समर्थन किया। उनके भरोसे और प्यार की वजह से मैं आज यहां तक पहुंच सकी हूं।
कोच विजय शर्मा की मेहनत को भी बताया अहम
मीराबाई ने अपने लंबे समय के कोच विजय शर्मा की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बड़े टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं होता। इसके लिए रोज कड़ी मेहनत, अनुशासन और पूरे फोकस की जरूरत होती है। विजय शर्मा ने शुरुआत से ही उनकी तकनीक, फिटनेस और मानसिक तैयारी पर लगातार काम किया। जब भी मुश्किल समय आया, उन्होंने सही मार्गदर्शन दिया और आगे बढ़ने का हौसला दिया। मीराबाई ने कहा, “हर प्रतियोगिता के लिए अलग तरह की तैयारी करनी होती है। अच्छा प्रदर्शन करने के साथ उसे लंबे समय तक बनाए रखना भी जरूरी होता है। विजय सर ने हर कदम पर मेरा साथ दिया और हमेशा सही दिशा दिखाई।”
पहला प्रयास असफल, फिर की शानदार वापसी
फाइनल मुकाबले में मीराबाई की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने 82 किलोग्राम वजन उठाने की पहली कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकीं। पहली असफल कोशिश के बाद उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरी कोशिश में उन्होंने 82 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद तीसरे प्रयास में 85 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बना दिया। उन्होंने बताया कि पहले प्रयास में गलती उनकी अपनी थी। इसके बाद उन्होंने और उनकी टीम ने तय किया कि अब पूरी ताकत के साथ मुकाबला करना होगा।
वजन नियंत्रित रखना भी रहा बड़ी चुनौती
मीराबाई ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए अपने शरीर का वजन 48 किलोग्राम वर्ग तक बनाए रखना उनके लिए सबसे कठिन कामों में से एक था। उन्होंने कहा, मैंने लंबे समय तक अपना वजन नियंत्रित रखा। 48 किलोग्राम वर्ग तक वजन लाना मेरे लिए काफी मुश्किल रहा, लेकिन मैंने इसके लिए लगातार मेहनत की।
क्लीन एंड जर्क में दिखाया दम
स्नैच के बाद क्लीन एंड जर्क स्पर्धा में भी मीराबाई ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। पहली कोशिश में वह वजन नहीं उठा सकीं, लेकिन उन्होंने जल्द ही शानदार वापसी की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 105 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। यह उनके बाकी सभी प्रतिद्वंद्वियों से करीब आठ किलोग्राम ज्यादा था। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने आसानी से गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
राष्ट्रगान सुनकर छलक पड़े खुशी के आंसू
जब पुरस्कार वितरण समारोह में भारत का राष्ट्रगान बजा, तब मीराबाई अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्होंने कहा, जब भी भारत का राष्ट्रगान बजता है और हम उसे सुनते हैं, तो अपने आप आंखों में आंसू आ जाते हैं। ये खुशी के आंसू होते हैं। भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।
नाइजीरिया की रूथ न्योंग ने जीता सिल्वर मेडल
नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने स्नैच में 75 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 93 किलोग्राम वजन उठाया। पदक जीतने के बाद उन्होंने कहा, “यह पदक मेरे लिए बहुत खास है। इसे जीतना बिल्कुल आसान नहीं था। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ पदक जीतने पर था। मुझे अपनी ट्रेनिंग पर पूरा भरोसा था। मैं मीराबाई चानू को गोल्ड मेडल जीतने पर दिल से बधाई देती हूं।”
मलेशिया की आइरीन हेनरी को मिला ब्रॉन्ज
मलेशिया की आइरीन हेनरी ने कुल 167 किलोग्राम वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 77 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 90 किलोग्राम वजन उठाया। आइरीन ने कहा, “यह पदक मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे उम्मीद है कि इससे मलेशिया के लोगों को खुशी और गर्व महसूस होगा। मैंने पहले भी मीराबाई चानू के साथ कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। हम अच्छे दोस्त हैं और इंस्टाग्राम पर भी एक-दूसरे को फॉलो करते हैं।”
भारतीय प्रशंसकों में खुशी की लहर
मीराबाई की ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। एक प्रशंसक ने कहा, “मीराबाई का प्रदर्शन शानदार था। बाकी खिलाड़ी जहां 80 से 85 किलोग्राम तक वजन उठा रही थीं, वहीं मीराबाई ने 105 किलोग्राम वजन उठाकर सभी को पीछे छोड़ दिया। यह सचमुच अविश्वसनीय था। उन्होंने पूरे मुकाबले में अपना दबदबा दिखाया। भारत का नाम रोशन करने के लिए हमें उन पर गर्व है।” एक अन्य प्रशंसक ने कहा, “मैंने पहली बार ऐसा वेटलिफ्टिंग मुकाबला देखा। मीराबाई चानू ने बेहतरीन खेल दिखाया। जब भारत का राष्ट्रगान बजा तो बहुत गर्व महसूस हुआ। यह पल हमेशा याद रहेगा।”
मीराबाई की जीत बनी पूरे देश के लिए गर्व का पल
लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
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