नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार (3 अगस्त) को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपनी जीत बताया, वहीं ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि महिला पहलवान अब इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगी।
यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया।
फैसले के बाद विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों को एक प्रभावशाली नेता के खिलाफ आवाज उठाने और एफआईआर दर्ज कराने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। विनेश फोगाट ने आरोप लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपने प्रभाव और ताकत के बल पर कई लड़कियों को डराने की कोशिश की, लेकिन कुछ महिला पहलवान अपनी लड़ाई पर डटी रहीं और अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रखी।
उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा बृजभूषण शरण सिंह को दोषी नहीं मानने से महिला पहलवानों को दुख पहुंचा है। विनेश ने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही सरकार और पूरा तंत्र उन्हें बचाने में लगा रहा। उन्होंने बताया कि महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के निर्देश दे दिए हैं।
— Vinesh Phogat (@Phogat_Vinesh) August 3, 2026
अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें पहले दिन से ही भरोसा था कि वह निर्दोष साबित होंगे। उन्होंने कहा कि अगर आरोप साबित होते तो वह सजा भुगतने के लिए तैयार थे। उन्होंने अदालत के फैसले को अपने और अपने समर्थकों के लिए अच्छी खबर बताया।
यह मामला जनवरी 2023 में चर्चा में आया था, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया समेत कई बड़े पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए थे। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी और WFI अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। इसके बाद खेल मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक निगरानी समिति बनाई थी। पहलवानों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई संतोषजनक नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने दोबारा आंदोलन किया।
अप्रैल 2023 में छह महिला पहलवानों ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं। इनमें से एक एफआईआर छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायत पर और दूसरी नाबालिग पहलवान की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुई थी।
बाद में नाबालिग पहलवान से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। वयस्क महिला पहलवानों से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में चार्जशीट दाखिल की थी। मई 2024 में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए थे। दोनों ने खुद को निर्दोष बताया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 3 अगस्त 2026 को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया।
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