Last Updated: September 29, 2026

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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, ‘दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमले के पीछे अल-कायदा का था हाथ’

August 13, 2026

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, ‘दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमले के पीछे अल-कायदा का था हाथ’

नई दिल्लीः संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी टीम की ताजा रिपोर्ट में नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए हमले को लेकर एक अहम बात सामने आई है। रिपोर्ट में इस हमले को पहली बार सीधे तौर पर अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जोड़ा गया है। हालांकि, भारत में इस मामले की जांच अभी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में सामने आई जानकारी को जांच से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दावा माना जा रहा है, जबकि भारत की जांच के अंतिम निष्कर्ष अलग से सामने आएंगे।

38वीं रिपोर्ट में सामने आई जानकारी
यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में दी गई है। यह रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 से 9 जून 2026 के बीच आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनसे जुड़े घटनाक्रम का आकलन करती है। रिपोर्ट अगस्त 2026 में सुरक्षा परिषद के सामने रखी गई। रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों, दक्षिण एशिया में आतंकी संगठनों के बदलते तरीके और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव जैसे कई मुद्दों पर जानकारी दी गई है।

AQIS अब छोटे-छोटे गुटों में काम कर रहा है

रिपोर्ट के अनुसार, AQIS पहले की तुलना में कमजोर और बिखरा हुआ संगठन दिखाई देता था। लेकिन अब उसने अपने काम करने का तरीका बदल लिया है। अब संगठन बड़े समूहों में काम करने के बजाय छोटी-छोटी और अलग-अलग टुकड़ियों में गतिविधियां चला रहा है। ऐसा करने से सुरक्षा एजेंसियों के लिए पूरे नेटवर्क का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AQIS ने अपने लिए अलग लॉजिस्टिक और फंडिंग नेटवर्क तैयार किया है। इसका मतलब है कि संगठन अपने सदस्यों तक जरूरी संसाधन पहुंचाने और अपनी गतिविधियों के लिए पैसे जुटाने के लिए अलग नेटवर्क विकसित कर रहा है।

बांग्लादेश तक फैल सकता है नेटवर्क
संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम ने यह आशंका भी जताई है कि AQIS आने वाले समय में बांग्लादेश में अपने ठिकाने बनाने की कोशिश कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो दक्षिण एशिया में संगठन का प्रभाव और गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे भारत और उसके आसपास के देशों की सुरक्षा के लिए नई चुनौती पैदा हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के दोनों ओर हिंसक घटनाएं और सीमा पार हमले बढ़े हैं। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में मौजूद तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन या सुरक्षित जगह दे रहा है। TTP पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय संगठन है। इसके हमलों के कारण पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर दबाव बढ़ा है और दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा है।

AQIS का पाकिस्तान में हुए हमलों से भी संबंध
रिपोर्ट में AQIS को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में सक्रिय इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान (IMP) के हमलों से भी जोड़ा गया है। इन घटनाओं में बन्नू में एक सुरक्षा चौकी के पास हुआ आत्मघाती हमला भी शामिल बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि AQIS और क्षेत्र में सक्रिय दूसरे आतंकी नेटवर्कों के बीच संपर्क या सहयोग की संभावनाओं को संयुक्त राष्ट्र गंभीरता से देख रहा है।

आतंकवादी अब AI का भी इस्तेमाल कर रहे हैं
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग से जुड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम के अनुसार, आतंकी संगठन अब ChatGPT जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल बम बनाने और हमलों के लिए लक्ष्य चुनने जैसी जानकारी हासिल करने के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं। AI का इस्तेमाल केवल हमले की तैयारी के लिए ही नहीं, बल्कि प्रचार के लिए भी किया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ISIL-K अलग-अलग भाषाओं में अपनी प्रचार सामग्री तैयार करने और उसका तेजी से अनुवाद करने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इससे आतंकी प्रचार को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।

खतरनाक रसायनों को लेकर भी चिंता
रिपोर्ट में आतंकी संगठनों की रासायनिक और जैविक हथियारों में रुचि को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ISIL की अंग्रेजी भाषा की पत्रिका Invade में बोटुलिनम टॉक्सिन और साइनाइड जैसे खतरनाक रसायनों से जुड़ी सामग्री प्रकाशित की गई। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि आतंकी संगठन केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रासायनिक और जैविक खतरों से जुड़ी क्षमताओं में भी रुचि बनाए हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र की आतंकी प्रतिबंध सूची में बदलाव
रिपोर्ट की अवधि के दौरान संयुक्त राष्ट्र की आतंकी प्रतिबंध सूची में भी बदलाव किए गए। इस दौरान तीन नए नाम सूची में जोड़े गए, जबकि सात नाम हटा दिए गए। सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक 27 फरवरी 2026 को हुआ। उस दिन अल-नुसरा फ्रंट, जिसे बाद में हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नाम से भी जाना गया, का नाम संयुक्त राष्ट्र की इस प्रतिबंध सूची से पूरी तरह हटा दिया गया।

 

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