
Former minister’s questions regarding railway fines : अमृतसर। दुर्गियाना तीर्थ की अध्यक्ष और पूर्व मंत्री लक्ष्मी कांता चावला का कहना है कि रेलवे ने जुर्माना तय करने में खामियां बरती हैं। उनका कहना था कि रेलवे स्टेशन परिसर या ट्रेन में भीख मांगने अथवा बिना अनुमति सामान बेचने वाले व्यक्ति पर 2000 का जुर्माना तय किया है, जबकि शराब पीकर रेलवे परिसर या ट्रेन में हुड़दंग करने वाले व्यक्ति पर केवल 1000 रुपये का जुर्माना लगेगा।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भीख मांगकर अपना गुजारा कर रहा है, वह दो हजार रुपये का जुर्माना आखिर कहां से भरेगा? यदि वह जुर्माना भरने में सक्षम नहीं है तो उसके सामने कानूनी कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में व्यवस्था का उद्देश्य सुधार के बजाय गरीब व्यक्ति के लिए नई परेशानी पैदा करने वाला साबित हो सकता है। रेलवे परिसर में बिना प्लेटफार्म टिकट प्रवेश करने पर पांच सौ रुपये का जुर्माना है, जबकि भीख मांगने वाले व्यक्ति पर दो हजार रुपये का दंड तय किया गया है। इस अंतर पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। रेलवे में भीख मांगने वालों को हटाने के लिए प्रशासनिक और सामाजिक उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन गरीबी को भारी आर्थिक दंड से दंडित करना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं लगता। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह है कि इस व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के साथ-साथ व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय होनी चाहिए। शराब या नशे की हालत में यात्रियों से दुर्व्यवहार करने, उपद्रव मचाने अथवा रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित करने वालों पर अधिक कठोर आर्थिक दंड होना चाहिए। सरकार को ऐसे नियम बनाने चाहिए जिनसे कानून-व्यवस्था भी कायम रहे और गरीब व जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशीलता भी दिखाई दे। रेलवे स्टेशनों को भिक्षावृत्ति से मुक्त करना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए मानवीय और व्यावहारिक रास्ता अपनाना भी उतना ही जरूरी है। रेलवे मंत्रालय को इस फैसले पर पुनर्विचार कर जुर्माने की राशि में संतुलन कायम करना चाहिए।
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