
अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने डेरा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सरकार द्वारा पैरोल दिए जाने पर कड़ा एतराज जताया है, जो मर्डर और रेप जैसे गंभीर अपराधों की सजा काट रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला दोहरे और भेदभाव वाले नजरिए को साफ करता है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि एक तरफ तो सरकार द्वारा गुरमीत राम रहीम को बार-बार फरलो और पैरोल देकर खास सुविधाएँ दी जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से जेलों में बंद सिंहों को उनके बीमार परिवार वालों से मिलने के लिए भी पैरोल नहीं दी जा रही है। ऐसा बर्ताव देश में कानून और न्याय के बराबर इस्तेमाल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। तीन दशकों से देश की अलग-अलग जेलों में बंद बंदी सिंहों का मामला भी सरकारों की इसी भेदभाव वाली नीति का प्रतीक बन गया है। बंदी सिंहों ने अपनी कानूनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिहाई में देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि यह बहुत चिंता की बात है कि सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए गुरमीत राम रहीम के गंभीर अपराधों को नजरअंदाज करते हुए बार-बार पैरोल और फर्लो दे रही हैं और दूसरी तरफ बंदी सिंहों के मामले में भेदभाव वाला रवैया अपना रही हैं। सरकारों को यह समझना चाहिए कि ऐसे दोहरे रवैये से सिख समुदाय के अंदर अलगाव की भावना और गहरी होती है।
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