
Janmashtami at Muralidhar Temple : कुल्लू। बंजार घाटी के कोठी चैहनी गांव में स्थित सदियों पुराना भगवान श्रीकृष्ण का मुरलीधर मंदिर आज भी आस्था, इतिहास और प्राचीन वास्तुकला का अद्भुत संगम है। 16वीं शताब्दी में मंडी के राजा मंगल सेन की ओर से स्थापित इस मंदिर में लाई गई वृंदावन की श्रीकृष्ण प्रतिमा श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है।
मान्यता है कि कुल्लू जिले में जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत सबसे पहले इसी पावन मंदिर से हुई थी, जहां आज भी जन्माष्टमी, होली और बसंत पंचमी पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। 4 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। तो वहीं इसके लिए विभिन्न मंदिरों में तैयारी भी हो रही है। हिमाचल प्रदेश की बात करें तो यहां पर भी विभिन्न मंदिरों में शुक्रवार को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाएगा और देर रात भगवान श्री कृष्ण को झूला भी झुलाया जाएगा। ऐसे में जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार के कोठी चेहनी की गांव में भगवान कृष्ण के मुरली धर मंदिर की बात करें तो यहां पर भी जन्माष्टमी के त्योहार की तैयारियां पूरी हो गई हैं।
इस मंदिर की खास बात यह है कि यह मंदिर 16वीं शताब्दी में मंडी के राजा मंगल सेन के द्वारा बनाया गया था और उसे दौरान भगवान कृष्ण की यह मूर्ति वृंदावन से लाई गई थी। ऐसे में आज इस मंदिर को मुरलीधर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और जन्माष्टमी के साथ-साथ बसंत पंचमी और होली का त्यौह भी यहां विशेष रूप से मनाया जाता है। गांव में 16 वीं शताब्दी में स्थापित मुरली मननोहर मंदिर का निर्माण मंडी के राजा मंगल सेन ने करवाया था। राजा मंगल सेन ने मुरली धर की मूर्ति वृंदावन से लाई थी और पहले इसे जिला कुल्लू के मंगलौर में रखा गया था। ये मंदिर भी 4 मंजिला है। ऐसे में बंजार घाटी के आराध्य देवता श्रृंगा ऋषि जब-जब भी इस गांव में आते हैं। तब-तब उनका रथ मुरली मनोहर मंदिर में ही ठहरता है.यहां पर होली और जन्माष्टमी के उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं। वही इस मंदिर की खास बात यह है कि जब 16वीं शताब्दी में यहां पर भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना की गई।
यहां पर पहली बार जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया गया और उसके बाद ही जिला कुल्लू के विभिन्न मंदिरों में जन्माष्टमी का त्यौहार उत्सव की तरह बनाए जाने लगा। भगवान श्री कृष्ण के मंदिर की अगर बात करें तो यह 16वीं शताब्दी में बनाया गया है और आज भी पूरा मंदिर अपने स्वरूप में टिका हुआ है। मंदिर पत्थर और लकड़ी से पूरी तरह से तैयार किया गया है और अंदर दीवारों पर मिट्टी का प्लास्टर चढ़ाया गया है। इससे गर्मियों में यह मंदिर ठंडा और सर्दियों में गर्म रहता है। मंदिर का इतिहास जानने के लिए कई शोधार्थी, इतिहासकार भी यहां पहुंचते हैं और मंदिर के निर्माण शैली की भी जानकारी लेते हैं। इसके अलावा बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों के लिए भी यह मंदिर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कई वास्तुकार भी इस मंदिर का दौरा कर चुके हैं और मंदिर निर्माण की बारीकियां की भी जानकारी ले चुके हैं। क्योंकि यह मंदिर 16वीं शताब्दी से लेकर आज तक अपनी पुरानी अवस्था में ही टिका हुआ है। मंदिर के गर्भगृह का स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा लकड़ी का कार्य किया गया है, जिससे कि यह सुंदर और आकर्षक दिख सके।
भगवान मुरलीधर के पुजारी चेतराम शर्मा ने बताया कि यह मंदिर काफी प्राचीन है और आज भी यहां पर दिन के चार समय भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना की जाती है। यहां पर रोजाना सभी ग्रामीणों के द्वारा अपने घर से दूध लाया जाता है और दूध में गंगाजल डालकर उसके बाद भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति का स्नान किया जाता है रोजाना भगवान श्री कृष्ण के वस्त्र बदले जाते हैं और श्रद्धालुओं की ओर से यहां भजन कीर्तन किया जाता है। पुजारी चेत राम शर्मा ने बताया कि मंदिर में जन्माष्टमी होली और बसंत पंचमी का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया जाता है और जिला कुल्लू के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां भगवान श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं को खराब सड़क का मलाल रहता है। क्योंकि यहां तक आने वाली सड़क काफी खस्ता हालत में है और श्रद्धालुओं को यहां आने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में प्रशासन और सरकार को चाहिए कि वह गांव तक आने वाली सड़क की हालत में सुधार करें। ताकि देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को भी परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं कोठी चेहनी गांव की रहने वाली युवती अंजलि ने बताया कि वह इसी गांव के रहने वाली हैं और उन्हें जन्माष्टमी के त्यौहार का भी काफी इंतजार रहता है। जन्माष्टमी के दिन वह सभी मंदिर में एकत्र होते हैं और शाम के समय मंदिर में भजन कीर्तन भी किया जाता है। भगवान कृष्ण का स्नान करने के बाद उन्हें विशेष परिधान बनाए जाते हैं और सभी श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण को झूला भी झूलते हैं। स्थानीय युवती कंगना का कहना है कि उनके गांव में भगवान श्री कृष्ण का मंदिर सैकड़ो साल पुराना है और भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति भी काफी प्राचीन है। जो देखने में भी काफी सुंदर है।
जन्माष्टमी का त्यौहार मनाने के लिए आसपास के इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं और यहां स्थानीय लोगों के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से प्रसाद की भी व्यवस्था की जाती है। स्थानीय युवती शबनम ने बताया कि जन्माष्टमी के साथ-साथ होली और बसंत पंचमी का त्योहार पर भी भगवान श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए सैकड़ो लोग यहां पर पहुंचते हैं। जन्माष्टमी का त्योहार गांव में सभी लोग मिलकर मनाते हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाकर उनका आशीर्वाद भी ग्रहण करते हैं। इस साल भी जन्माष्टमी का त्योहार सभी ग्रामीणों के द्वारा धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।
मेष: दिन शुभ रहेगा...