Last Updated: October 25, 2026

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Supta Matsyendrasana Benefits: कब्ज से राहत और पीठ को आराम देने में मदद करता है यह योगासन, जानें सही तरीका

September 8, 2026

Supta Matsyendrasana Benefits: कब्ज से राहत और पीठ को आराम देने में मदद करता है यह योगासन, जानें सही तरीका

Supta Matsyendrasana: आजकल लंबे समय तक दफ्तर में बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण कमर दर्द, पीठ में जकड़न और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में स्वस्थ खानपान के साथ योग को दिनचर्या में शामिल करना शरीर को बेहतर रखने में मदद कर सकता है। योग के विभिन्न आसनों में सुप्त मत्स्येंद्रासन एक उपयोगी आसन माना जाता है, जो शरीर को आराम देने के साथ मानसिक शांति में भी सहायक हो सकता है।

सुप्त मत्स्येंद्रासन को अंग्रेजी में सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट या रिक्लाइंड ट्विस्ट कहा जाता है। इसका नाम संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें ‘सुप्त’ का अर्थ लेटना, ‘मत्स्येंद्र’ का संबंध योगी मत्स्येंद्रनाथ से और ‘आसन’ का अर्थ विशेष शारीरिक मुद्रा से है। यह आसन लेटकर किया जाता है और शरीर को धीरे-धीरे मोड़ने पर आधारित है।

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इसे अर्ध मत्स्येंद्रासन का लेटकर किया जाने वाला सरल और आरामदायक रूप माना जाता है। इस मुद्रा में शरीर को अधिक जोर लगाने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण की सहायता से रीढ़ को हल्का मोड़ मिलता है। यही कारण है कि यह आसन शरीर पर अत्यधिक दबाव डाले बिना रीढ़ और आसपास की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद कर सकता है।

योग की पारंपरिक पद्धतियों में यह आसन विश्राम और रीढ़ की हड्डी के तनाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास रीढ़ के लचीलेपन को बनाए रखने और पीठ की अकड़न कम करने में सहायक हो सकता है। साथ ही, शरीर की हल्की ट्विस्टिंग पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

सुप्त मत्स्येंद्रासन करते समय व्यक्ति पीठ के बल लेटता है और एक घुटने को मोड़कर शरीर के दूसरी दिशा में ले जाता है। इसी दौरान संबंधित हाथ को बाहर की ओर फैलाया जाता है। इस स्थिति में कमर से लेकर गर्दन तक रीढ़ को हल्का मोड़ मिलता है, जिससे पीठ और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियों को खिंचाव और आराम मिल सकता है।

नियमित रूप से अभ्यास करने पर यह आसन रीढ़ की गतिशीलता बढ़ाने, कूल्हों के तनाव को कम करने और शरीर को आराम की स्थिति में लाने में मदद कर सकता है। हालांकि, योग की शुरुआत करने वाले लोगों को इसे प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए। यदि हाल ही में रीढ़, कूल्हे, घुटने या कंधे में चोट लगी है या किसी प्रकार की सर्जरी हुई है, तो इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

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