Last Updated: September 26, 2026

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The Vvaan Movie Review: कहानी में नहीं दिखा दम, हिंदी बेल्ट को भी सही से टारगेट नहीं कर पाई पीआर स्ट्रैटेजी

September 26, 2026

The Vvaan Movie Review: कहानी में नहीं दिखा दम, हिंदी बेल्ट को भी सही से टारगेट नहीं कर पाई पीआर स्ट्रैटेजी

The Vvaan Movie Review(Farid Shaikh): सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की ‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ एक ऐसे विषय के साथ आती है, जिसमें लोककथाओं, अलौकिक तत्वों, आस्था और रहस्य को जोड़ने की कोशिश की गई है। लेकिन दिलचस्प अवधारणा होने के बावजूद फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका कमजोर प्रस्तुतीकरण बन जाता है।

फिल्म की कहानी कई जगह जरूरत से ज्यादा खिंची हुई महसूस होती है। शुरुआत में रहस्यमयी जंगल और वन देवी की कहानी दर्शकों के मन में उत्सुकता पैदा करती है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, इसकी पटकथा बिखरती हुई नजर आती है। डर और फैंटेसी का प्रभाव भी पूरी फिल्म में लगातार बना नहीं रह पाता।

सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार एक नास्तिक से आस्था रखने वाले व्यक्ति बनने की यात्रा तय करता है, लेकिन इस बदलाव में वह भावनात्मक गहराई दिखाई नहीं देती जिसकी कहानी को आवश्यकता थी। उनके कई संवाद और गंभीर दृश्य अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते। वहीं, तमन्ना भाटिया को मजबूत किरदार मिलने के बावजूद पटकथा उनके अभिनय का पूरा लाभ नहीं उठा पाती।

फिल्म के दृश्य प्रभाव कई जगह कमजोर नजर आते हैं। जिस रहस्यमयी जंगल और अलौकिक दुनिया को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनना चाहिए था, वह कई दृश्यों में कृत्रिम और कम प्रभावशाली दिखाई देती है।

हास्य के कुछ दृश्य भी कहानी के गंभीर माहौल को तोड़ते हैं। मनीष पॉल का ट्रैक हर दर्शक को प्रभावित नहीं कर पाता, जबकि सुनील ग्रोवर और अन्य सहायक कलाकारों को भी पटकथा से उतना सहयोग नहीं मिलता।

फिल्म की सबसे बड़ी कमी यह है कि जिस लोककथा आधारित फैंटेसी को बेहद रोमांचक और प्रभावशाली बनाया जा सकता था, वह कई जगह अनुमानित और जरूरत से ज्यादा नाटकीय लगती है। क्लाइमैक्स भी उस स्तर का असर नहीं छोड़ता जिसकी इतनी बड़ी कहानी के बाद उम्मीद की जाती है।

निर्णय: ‘द व्वान’ की अवधारणा दिलचस्प है, लेकिन कमजोर पटकथा, असंगत दृश्य प्रभाव, असंतुलित अभिनय और फीके प्रस्तुतीकरण के कारण फिल्म अपने पूरे सामर्थ्य तक नहीं पहुंच पाती। कहानी में नहीं दिखा दम, हिंदी बेल्ट को भी सही से टारगेट नहीं कर पाई पीआर स्ट्रैटेजी

Dainik Savera Times News Media Network की ओर से इस फिल्म को ⭐ 1.5 स्टार।

फिल्म की कमजोर कहानी के साथ-साथ इसका प्रमोशन भी प्रभावी नजर नहीं आया। खासकर नॉर्थ के हिंदी बेल्ट में फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने और सिनेमाघरों तक खींचकर लाने में PR टीम की रणनीति कमजोर साबित हुई।

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