Stubble Burn: पंजाब में धान की कटाई के शुरुआती दौर के साथ ही पराली जलाने (क्रॉप रेसिड्यू बर्निंग) की घटनाओं पर निगरानी और सख्त कार्रवाई तेज कर दी गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएमएस) और राज्य प्रशासन की निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर तक राज्य भर में सैटेलाइट और प्रोटोकॉल के तहत अब तक आगजनी की कुल 40 घटनाएं सामने आई हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक 21 मामले अमृतसर जिले में दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 14 खेतों का मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया और 4 मामलों में आग लगने की पुष्टि हुई। इसके बाद तरनतारन में 6 और फिरोजपुर में 5 मामले सामने आए हैं। गुरदासपुर में 2, जबकि फाजिल्का, होशियारपुर, शहीद भगत सिंह नगर (एसबीएस नगर), पटियाला और रूपनगर में 1-1 मामला दर्ज हुआ है। राज्य भर में कुल 28 खेतों का भौतिक निरीक्षण किया गया, जिनमें से 12 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है।
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नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विभाग ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। कुल 8 मामलों में 40,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा (ईसी) लगाया गया है, जिसमें से 10,000 रुपये की वसूली की जा चुकी है। इसमें फिरोजपुर पर 15,000 रुपये, तरनतारन पर 10,000 रुपये, अमृतसर पर 5,000 रुपये, होशियारपुर पर 5,000 रुपये और पटियाला पर 5,000 रुपये का जुर्माना शामिल है। वहीं, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत पटियाला जिले में 1 मामला दर्ज किया गया है।
राजस्व रिकॉर्ड में कुल 5 मामलों में जमीन पर ‘रेड एंट्री’ दर्ज की गई है, जिनमें फिरोजपुर में 3 और तरनतारन में 2 मामले शामिल हैं। वहीं, कर्तव्य में कोताही बरतने वाले नोडल व सुपरवाइजरी अधिकारियों को फिरोजपुर जिले में 4 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि सरकार और प्रशासन हर साल पराली जलाने पर कार्रवाई करने के साथ किसानों को जागरूक करते है। इसके बावजूद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के मामले सामने आते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है, गंभीर वायु प्रदूषण फैलता है और मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।