पंजाब डेस्क: श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े मामले को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पदाधिकारियों ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच रिपोर्ट आने से पहले अंतिम सत्य मान लेना न्यायसंगत नहीं है। इससे न केवल निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है, बल्कि पूरे मामले को लेकर गलत धारणा भी बन सकती है।
जांच के नतीजे का इंतजार जरूरी
SGPC के जूनियर उपाध्यक्ष बलदेव सिंह कल्याण, पूर्व अध्यक्ष अलविंदरपाल सिंह पखोके, अंतरिम कमेटी सदस्य सुरजीत सिंह तुगलवाल, सदस्य सुरजीत सिंह भिट्टेवड, एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका, गुरबचन सिंह करमूवाला, बावा सिंह गुमानपुरा और अमरजीत सिंह बंडाला ने सोशल मीडिया पर सिख शख्सियतों और SGPC के खिलाफ चलाए जा रहे कथित गलत प्रचार पर प्रतिक्रिया दी।
पदाधिकारियों ने कहा कि SGPC अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी का गठन किया है। इसके अलावा पुलिस भी दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की जांच कर रही है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी एक पक्ष के बयान को पूरी तरह सच मानकर किसी व्यक्ति या संस्था के बारे में फैसला सुनाना उचित नहीं होगा।
आरोपों की सच्चाई जांच का विषय
SGPC पदाधिकारियों ने कहा कि संवेदनशील मामलों को सोशल मीडिया पर बन रही धारणाओं या एकतरफा बयानों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी आरोप की वास्तविकता तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की ओर से कोई आरोप लगाया गया है तो उसकी सत्यता तय करना जांच एजेंसियों और जांच कमेटी का काम है। इसलिए जांच पूरी होने तक सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
तथ्य सामने आने के बाद होगी कार्रवाई
पदाधिकारियों के मुताबिक SGPC का स्पष्ट रुख है कि मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट के जरिए तथ्यों के साथ सामने आनी चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या जिम्मेदारी तय होती है, तो संस्थागत नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले SGPC से जुड़ी किसी भी शख्सियत के खिलाफ नकारात्मक धारणा बनाना उचित नहीं है।
हरजिंदर सिंह धामी के समर्थन में बयान
SGPC पदाधिकारियों ने एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी छवि ईमानदार और समर्पित व्यक्ति की रही है। उन्होंने कहा कि धामी की लंबे समय से की जा रही सेवाओं को नजरअंदाज कर बिना ठोस तथ्यों के आरोप लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के घर के बाहर धरना देना भी किसी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। पदाधिकारियों ने अपील की कि मामले में तथ्यों के सामने आने तक संयम रखा जाए और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली बयानबाजी से बचा जाए।
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