बिलासपुर। बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा की डिग्री हासिल करने के बाद डॉक्टरों का दायित्व केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के दूरदराज और जरूरतमंद क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचानी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के कई ग्रामीण, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। ऐसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और बेहतर चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने डिग्री हासिल करने वाले चिकित्सकों से अपने पेशे को केवल रोजगार के रूप में नहीं, बल्कि समाज सेवा के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि वह स्वयं भी एक दुर्गम एवं आदिवासी क्षेत्र से संबंध रखती हैं और वहां के लोगों की चुनौतियों तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी शहरों के समान बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना उनका अधिकार है।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विस्तार के साथ-साथ डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।

एम्स बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले चिकित्सकों के लिए यह अवसर उनके पेशेवर जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक रहा। राष्ट्रपति ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
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