मोगा: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर के कप्तानी छोड़ने के फैसले के बाद उनके क्रिकेट सफर और संघर्ष की कहानी एक बार फिर चर्चा में है। हरमनप्रीत ने कप्तानी की जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला किया है, लेकिन उन्होंने क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया है। वह आगे भी भारतीय टीम के लिए बतौर खिलाड़ी योगदान देती रहेंगी। इसी बीच उनके शुरुआती क्रिकेट सफर को करीब से देखने वाले कोच कमलदीस पाल सिंह सोढ़ी ने उनके संघर्ष, मेहनत और जुनून से जुड़ी कई पुरानी यादें साझा की हैं।
बचपन में ही पहचान ली थी प्रतिभा
कोच सोढ़ी ने बताया कि हरमनप्रीत बचपन से ही बेहद जुझारू, मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित थीं। वह खुद भी क्रिकेट खेल चुके हैं और इसी दौरान दारापुर स्थित ज्योति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में उनका आना-जाना था। वहां उन्होंने हरमनप्रीत को अन्य बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते देखा।
उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर सोढ़ी ने हरमनप्रीत के पिता से संपर्क किया और स्कूल में लड़कियों की क्रिकेट टीम तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया।
लड़कियों की टीम ने राज्य स्तर पर मचाई धूम
शुरुआत में टीम में कुछ ही लड़कियां थीं, लेकिन खिलाड़ियों के उत्साह और मेहनत ने जल्द ही परिणाम देना शुरू कर दिया। 2007-08 के सत्र में टीम ने पहली बार राज्य स्तरीय चैंपियनशिप जीती।
इसके बाद टीम ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। नेशनल स्कूल गेम्स में टीम ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
लड़कों के साथ करती थीं कड़ा अभ्यास
सोढ़ी के मुताबिक हरमनप्रीत की सबसे बड़ी ताकत उनकी मेहनत और कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य हासिल करने की जिद थी। वह लड़कों के साथ अभ्यास करती थीं, ताकि तेज गेंदबाजी और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने की आदत विकसित हो सके।
अभ्यास के दौरान उन्हें कई बार 100 कैच पकड़ने जैसे लक्ष्य दिए जाते थे। हरमनप्रीत लक्ष्य पूरा किए बिना मैदान छोड़ने के लिए तैयार नहीं होती थीं। यही जिद आगे चलकर उनके क्रिकेट करियर की बड़ी ताकत बनी।
पंजाब टीम में चयन के लिए भी करना पड़ा संघर्ष
हरमनप्रीत के करियर में एक दौर ऐसा भी आया जब उन्हें पंजाब की टीम में जगह नहीं मिल पा रही थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए कोचों ने चयनकर्ताओं से उन्हें एक और मौका देने की अपील की। इसके बाद उन्हें पंजाब टीम में खेलने का अवसर मिला और यहीं से उनके करियर ने आगे की उड़ान भरी।
पंजाब के घरेलू क्रिकेट से निकलकर हरमनप्रीत ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई।
मैदान से बाहर जाकर शीशा तोड़ने वाला छक्का
कोच सोढ़ी ने हरमनप्रीत की बल्लेबाजी से जुड़ी एक पुरानी घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक राज्य स्तरीय फाइनल मुकाबले के दौरान हरमनप्रीत ने इतना जोरदार छक्का लगाया कि गेंद मैदान से बाहर जाकर एक मकान के शीशे से जा टकराई।
यह घटना उस समय उनकी कम उम्र में ही विकसित हो चुकी पावर हिटिंग क्षमता की झलक देती थी।
परिवार ने हर कदम पर दिया साथ
सोढ़ी ने कहा कि हरमनप्रीत के विश्व क्रिकेट तक पहुंचने में उनके परिवार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। उस दौर में लड़कियों के लिए क्रिकेट में आगे बढ़ने के अवसर आज की तुलना में काफी सीमित थे। इसके बावजूद उनके पिता ने हरमनप्रीत का हर कदम पर साथ दिया और उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।
171 रनों की पारी ने बनाई अलग पहचान
हरमनप्रीत ने भारतीय महिला क्रिकेट में कई यादगार उपलब्धियां हासिल की हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी 171 रनों की विस्फोटक पारी आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के बीच याद की जाती है। अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां खेलकर भारतीय टीम को गौरवान्वित किया।
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए पंजाब सरकार ने उन्हें डीएसपी के पद से भी सम्मानित किया।
कप्तानी छोड़ना संन्यास नहीं
हरमनप्रीत के कप्तानी छोड़ने के फैसले पर कोच सोढ़ी ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और वह इसका सम्मान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त होने का अर्थ क्रिकेट से संन्यास लेना नहीं है।
सोढ़ी के मुताबिक एक अनुभवी खिलाड़ी के रूप में हरमनप्रीत अभी भी भारतीय टीम को अपना अनुभव, नेतृत्व क्षमता और प्रदर्शन दे सकती हैं।
युवा खिलाड़ियों के लिए हरमनप्रीत प्रेरणा
युवा लड़कियों को संदेश देते हुए सोढ़ी ने कहा कि हरमनप्रीत कौर बनना आसान नहीं है। इसके लिए लगातार मेहनत, अनुशासन, संघर्ष और अपने लक्ष्य पर विश्वास जरूरी है।
उन्होंने बताया कि आज भी उनकी अकादमी में लड़कियों को लड़कों के साथ अभ्यास करवाया जाता है, ताकि वे बड़े स्तर के मुकाबलों के लिए मानसिक और खेल दोनों स्तरों पर मजबूत बन सकें।
मोगा से निकल रहे हैं नए क्रिकेट सितारे
सोढ़ी ने बताया कि उनकी अकादमी से कई खिलाड़ी आगे बढ़ चुके हैं। उनकी कोचिंग ले चुकी अमरपालपुर ढिल्लों आज कनाडा की क्रिकेट टीम से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि मोगा की धरती से आने वाले समय में कई और प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलेंगे और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।
📍 Location: मोगा
मेष: दिन शुभ रहेगा...