पालमपुर/शिमलाः भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए तथ्यों, प्रमाणों और सबूतों के साथ कांग्रेस पार्टी द्वारा लोकतंत्र पर किए गए कथित आघात का पर्दाफाश किया। त्रिलोक कपूर पीपीटी (PPT) प्रेजेंटेशन और आधिकारिक वोटर लिस्ट के साथ पूरी तैयारी से आए थे और उन्होंने कांग्रेस के इस पूरे घटनाक्रम को “पालमपुर वोट डकैती मॉडल” करार दिया।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) से कांग्रेस को डर क्यों?
त्रिलोक कपूर ने प्रेस वार्ता की शुरुआत में सीधा सवाल उठाया कि आखिर SIR (Special Intensive Revision) यानी वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण से कांग्रेस पार्टी को इतना डर क्यों लगता है? कपूर ने कहा कि कांग्रेस पहले EPIC (फोटो पहचान पत्र) का विरोध करती थी और अब SIR का विरोध कर रही है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रखा कि 1993 से पहले, जब वोटर लिस्ट में फोटो पहचान पत्र नहीं होता था, तब कांग्रेस का वोट शेयर 45% से 49% के बीच रहता था।
वर्ष 1993 में जब EPIC लागू हुआ और वोटर लिस्ट शुद्ध हुई, तो कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर सीधे 29%, 26% और 19% पर आ गया। त्रिलोक कपूर ने कहा कि जब-जब वोटर लिस्ट शुद्ध हुई है, तब-तब कांग्रेस की राजनीतिक जमीन खिसकी है; इसीलिए इन्हें शुद्धिकरण से डर लगता है।
पालमपुर नगर निगम चुनाव: 4,037 फर्जी वोटों का पूरा गणित
भाजपा नेता कपूर ने कहा कि वर्ष 2026 के पालमपुर नगर निगम चुनाव में पालमपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले 14 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी मात्र 1,341 वोटों के अंतर से चुनाव हारी थी। त्रिलोक कपूर ने खुलासा किया कि इस हार के पीछे कांग्रेस द्वारा पहले से तैयार की गई 4,037 अयोग्य, बाहरी और फर्जी वोटों की सेना थी।
इस वोट डकैती के आंकड़ों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि इसमें 1,627 दोहरे (डबल) वोटर शामिल हैं। ये मूलतः पालमपुर नगर निगम क्षेत्र के बाहर रहते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ता हैं, जिनका नाम पहले से ही नगर निगम के बाहर या दूसरे वार्ड में दर्ज है। उनका नाम मूल स्थान की वोटर लिस्ट से कटवाए बिना, झूठी घोषणा के आधार पर नगर निगम की नई वोटर लिस्ट में जोड़ा गया (यह आंकड़ा और बढ़ भी सकता है)।
इसके अलावा बिना EPIC, जीरो (0) हाउस नंबर, प्रवासी, विदेशी और मृतक वोटरों की संख्या 2,450 है। इनमें 888 से ज्यादा वोटर बिना EPIC नंबर वाले हैं और 573 से ज्यादा जीरो हाउस नंबर वाले हैं। सप्लीमेंट्री (पूरक) लिस्ट में शामिल हर वोटर के घर का नंबर 0 और EPIC नंबर खाली छोड़ा गया है।
मुख्य आरोपी और पारिवारिक व प्रशासनिक स्तर पर हेराफेरी के आरोप
त्रिलोक कपूर ने गंभीर तथ्यपूर्वक आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे षड्यंत्र, हेराफेरी, बेईमानी और वोट डकैती के सूत्रधार पालमपुर के माननीय विधायक श्री आशीष बुटेल हैं, और सबसे हैरानी की बात यह है कि इसकी शुरुआत उन्होंने अपने घर से की है। उन्होंने बताया कि विधायक आशीष बुटेल का परिवार एक ही घर में रहता है, लेकिन उनका मकान दो अलग-अलग मतदान केंद्रों में दर्शाया गया है। आशीष बुटेल का नाम हाउस नंबर 79/3 (मतदान केंद्र 1) और उनके पिता श्री BBL बुटेल का नाम हाउस नंबर 12/2 (मतदान केंद्र 2) में दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही घर के दो अलग-अलग नंबर क्यों हैं?
आगे तथ्य रखते हुए उन्होंने बताया कि विधायक आशीष बुटेल की बहन उपमा नैयर का वोट सुग्घर (वार्ड-5) में (वोट संख्या 48, EPIC: CBN0705004) दर्ज है, वहीं पठानकोट सेक्टर-10 में भी वोट संख्या 145 है, जहाँ अलग EPIC नंबर दर्ज है। यानी उनके पास दो अलग-अलग EPIC कार्ड हैं।
कपूर ने कहा कि विधायक के इलेक्शन एजेंट और चचेरे भाई अर्चित बुटेल का वोट पालमपुर में (वोट संख्या 1602) है और सुंगल पंचायत (वार्ड-2) में भी (वोट संख्या 201) दर्ज है; इनके भी दो अलग-अलग EPIC नंबर हैं।
विधायक के PSO के पिता प्रीतम लाल धीमान का वोट वार्ड-2 अप्पर पालमपुर में (वोट संख्या 459) है और 100 किमी दूर परागपुर विकासखंड की गुडारा चपलाह पंचायत में भी (वोट संख्या 176) दर्ज है, जिनके पास दो अलग EPIC नंबर हैं।
इसी प्रकार, विधायक के विधानसभा चुनाव के समय के अकाउंटेंट साकेतर सिंह राणा का वोट वार्ड-9 चौकी में (साकेतर सिंह राणा पुत्र मान सिंह, EPIC: NVF0460725) और वार्ड-5 सुघर में (सकतर सिंह पुत्र मान चंद, EPIC: CBN0750273) दर्ज है। उनकी पत्नी कुशला कुमारी के भी दो-दो वोट और दो अलग EPIC नंबर हैं।
त्रिलोक कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि आशीष बुटेल की बहन, चचेरे भाई, PSO के पिता व भाई, अकाउंटेंट व उनकी पत्नी के अलावा 1,627 अयोग्य कांग्रेस समर्थकों/कार्यकर्ताओं के वोट पालमपुर में बनाए गए थे। इसके साथ ही विधायक के बगीचे में काम करने वाले विदेशी नागरिकों और पठानकोट से कभी-कभार उनके होटल में आने-जाने वाले कैटरिंग कर्मचारियों, हलवाइयों व वेटरों के वोट भी पालमपुर नगर निगम में बना दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?
RTI से हुआ खुलासा: प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग
त्रिलोक कपूर ने बताया कि जब इस मामले पर आरटीआई (RTI) लगाई गई, तो और भी बड़ा घोटाला सामने आया। चुनाव कार्यालय SDM पालमपुर ने खुद माना कि वर्ष 2021 की वोटर लिस्ट उपलब्ध ही नहीं थी और बिना पिछली लिस्ट के ही नए वोट बना दिए गए।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि भाजपा समर्थित लोगों के वोट बनाने के दावों को गायब कर दिया गया। यह सभी दावे नगर निगम के एक आउटसोर्स कर्मचारी को सौंपे गए थे, जो खुद को यूथ कांग्रेस का कार्यकर्ता और विधायक का ‘हनुमान’ कहता है। यह एसडीएम पालमपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। वोट बनाने और काटने का पूरा जिम्मा नगर निगम के इसी आउटसोर्स कर्मचारी को दिया गया ।
नगर निगम में वोट बनाने का आधार Form-4 होता है, जिस पर झूठी घोषणाएं करवाकर जाली वोट बनाए गए। गड़बड़ी इतने बड़े स्तर की थी कि एक स्थानीय निवासी देविन्द्र कुमार के घर के पते पर, उनकी सहमति के बिना ही कई प्रवासियों के वोट बना दिए गए और एक के पिता का नाम भी ‘देविन्द्र कुमार’ ही दर्ज कर दिया गया।
क्षेत्रवार धांधलियों का ब्योरा देते हुए त्रिलोक कपूर ने बताया कि कश्मीर के गुरेज सेक्टर के अब्दुल रहमान और गुलाम रसूल मौलवी का वोट पालमपुर (वार्ड-2) में बनाया गया तथा पहलगाम के समीर मुहम्मद का वोट (वार्ड-3) में बनाया गया। सहारनपुर (पश्चिमी यूपी) के यूसुफ और रीना बेगम जैसे प्रवासियों को वार्ड-5 में वोटर बनाया गया। छत्तीसगढ़ के बारे लाल चौधरी के माध्यम से 250 मजदूरों के फर्जी वोट बनवाए गए। पठानकोट (पंजाब) के हलवाई और वेटर, जो केवल कभी-कभार कैटरिंग करने आते हैं, उनके वोट भी पालमपुर में दर्ज किए गए। भरमात वार्ड में कुल 1,582 वोटों में से केवल 1,030 वोट ही पड़े, क्योंकि वहाँ के संस्थानों के अधिकारियों के वोट बनाए ही नहीं गए थे।
पालमपुर के 18 से 25 वर्ष के असली युवाओं के वोट नहीं बनाए गए, जबकि बाहर के लोगों के वोट बना दिए गए। वार्ड-1 लोहना के 250 वोट नछीर पंचायत में भी दर्ज हैं। वार्ड-9 चौकी में दलित वर्ग के 90 वोट काट दिए गए और हर वार्ड से औसतन 20-30 पुराने वोटरों के नाम योजनाबद्ध तरीके से हटाए गए।
सबसे बड़े षड्यंत्र का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के दिन लिस्ट सार्वजनिक ही नहीं की गई। सप्लीमेंट्री (पूरक) लिस्ट भाजपा प्रत्याशियों को नामांकन के अंतिम समय तक भी उपलब्ध नहीं कराई गई, और उस लिस्ट में शामिल सभी वोटरों के घर का नंबर जीरो (0) था तथा EPIC नंबर गायब था।
कानूनी प्रावधान एवं भारतीय जनता पार्टी की माँगे
त्रिलोक कपूर ने स्पष्ट किया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 31 के अनुसार मतदाता सूची में झूठी घोषणा करके नाम दर्ज कराना या दो EPIC कार्ड रखना एक गंभीर अपराध है, जिसमें एक साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी की स्पष्ट माँग है:
इस पूरी वोट डकैती की सीबीआई (CBI) से निष्पक्ष जांच हो।
भाजपा नेता कपूर ने अंत में जोर देकर कहा कि यह लड़ाई केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच की नहीं है, बल्कि यह लड़ाई ‘फर्जी वोट बनाम असली वोटर’ और ‘लोकतंत्र की रक्षा’ की लड़ाई है, क्योंकि जब *तक फर्जी वोट जिंदा हैं, तब तक पालमपुर के असली वोटर का अधिकार खतरे में है।*
कांग्रेस द्वारा SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) का विरोध केवल इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण होते ही उनकी फर्जी वोटों की पोल खुल जाएगी और उनकी राजनीतिक बैसाखियां ढह जाएंगी।
📍 Location: शिमला (शिमला)
मेष: दिन शुभ रहेगा...