शिमला। भाजपा प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को सबसे पहले अपने दोहरे मापदंड का जवाब देना चाहिए। दिल्ली में कांग्रेस और उसके सहयोगी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को नकारता रहा है।
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का सिद्धांत अब बड़ा सरल दिखाई देता है—“चुनाव जीते तो जनादेश, चुनाव हारे तो चुनाव आयोग जिम्मेदार।” उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी चुनाव में हार के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा मांगा जा सकता है, तो हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की अपनी सरकार रहते हुए जनता द्वारा लगातार नकारे जाने के बाद क्या मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी कांग्रेस इस्तीफा मांगेगी?
उन्होंने कहा कि इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण 2026 के हिमाचल नगर निगम चुनाव हैं। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद चार नगर निगमों—मंडी, धर्मशाला, सोलन और पालमपुर—के चुनाव में भाजपा ने मंडी, धर्मशाला और सोलन तीन नगर निगम जीते, जबकि कांग्रेस केवल पालमपुर जीत पाई। इन चुनावों में 63 वार्डों में EVM से मतदान हुआ, जिनमें भाजपा ने 37 और कांग्रेस ने 23 वार्ड जीते, जबकि तीन निर्दलीय विजयी रहे।
शर्मा ने कहा, “राहुल गांधी जी बताएं—हिमाचल में सरकार आपकी, मुख्यमंत्री आपका, प्रशासन आपके शासन में और राज्य निर्वाचन आयोग के तहत चुनाव; फिर EVM से हुए चार नगर निगम चुनावों में कांग्रेस तीन क्यों हार गई? यदि हर हार के बाद किसी संवैधानिक पदाधिकारी का इस्तीफा मांगना कांग्रेस का सिद्धांत है, तो इस सिद्धांत को हिमाचल में भी लागू करके दिखाइए।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस EVM पर प्रश्न खड़े करती रही है, लेकिन हिमाचल के पंचायती राज चुनावों ने उसके इस तर्क को भी चुनौती दी। जिला परिषद के चुनाव बैलेट पेपर से हुए और वहां भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की तुलना में काफी अधिक सीटें जीतीं। उपलब्ध परिणामों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को 140, कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को 60 और अन्य को 50 सीटें बताई गईं, जिनमें उस समय सिरमौर की तीन सीटों के परिणाम शेष थे।
श्रीकांत शर्मा ने कहा, “EVM से चुनाव हुआ तो कांग्रेस हारी, बैलेट पेपर से चुनाव हुआ तो भी कांग्रेस हारी। अब कांग्रेस बताए कि दोष मशीन का है, बैलेट पेपर का है, चुनाव आयोग का है या कांग्रेस की नीतियों और नेतृत्व का?”
उन्होंने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का सत्यापन और उसे अद्यतन करना है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने पात्र मतदाताओं के नाम हटने जैसी चिंताएं जताई हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट अथवा अपात्र प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यदि किसी पात्र मतदाता के संबंध में ठोस शिकायत है तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ चुनाव आयोग के समक्ष रखना चाहिए, लेकिन पूरे SIR को राजनीतिक हथियार बनाकर संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर हमला करना उचित नहीं है।
शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जिन चुनावों में वह जीतती है, तब वही चुनावी व्यवस्था अचानक निष्पक्ष कैसे हो जाती है। हिमाचल प्रदेश में 2022 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने जीता, लेकिन तब उसने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाया। आज राजनीतिक परिस्थितियां प्रतिकूल होने पर उसी संस्था के मुखिया से इस्तीफा मांगना कांग्रेस की राजनीतिक सुविधा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “जनता का फैसला साफ है। बहाने नहीं, जवाब चाहिए। हिमाचल की जनता ने कांग्रेस की अपनी सरकार रहते हुए EVM से हुए नगर निगम चुनावों और बैलेट पेपर से हुए जिला परिषद चुनावों—दोनों में अपना संदेश दिया है। कांग्रेस को चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।”
श्रीकांत शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों को संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन आरोपों को तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। “कांग्रेस चुनाव परिणाम को अपनी सुविधा के अनुसार लोकतंत्र का प्रमाणपत्र देना बंद करे। जनादेश अपने पक्ष में हो तो स्वीकार करना और प्रतिकूल हो तो संस्था पर हमला करना लोकतांत्रिक जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता।”
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