Last Updated: October 16, 2026

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फरीदकोट में त्योहारों पर पटाखे फोड़ने का समय तय, दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक अनुमति

October 16, 2026

फरीदकोट में त्योहारों पर पटाखे फोड़ने का समय तय, दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक अनुमति

Faridkot Sets Timings for Firecrackers During Festivals : फरीदकोट। दिवाली, गुरुपर्व, क्रिसमस और नए साल के दौरान पटाखे फोड़ने के लिए जिला मजिस्ट्रेट राहुल चाबा ने समय-सीमा निर्धारित की है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जारी आदेशों के अनुसार, दिवाली पर 8 नवंबर को रात 8 से 10 बजे तक पटाखे फोड़े जा सकेंगे।

गुरुपर्व पर 24 नवंबर को सुबह 4 से 5 बजे और रात 9 से 10 बजे तक अनुमति होगी। क्रिसमस और नए साल पर निर्धारित रातों में 11:55 बजे से अगले दिन 12:30 बजे तक पटाखे चलाए जा सकेंगे। प्रशासन ने कहा कि इन आदेशों का उद्देश्य आग की घटनाओं, ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को नियंत्रित करना तथा लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए और माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा पंजाब सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए फरीदकोट के जिला मजिस्ट्रेट राहुल चाबा ने जिले में विभिन्न त्योहारों और नए साल के मौके पर पटाखे फोड़ने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की है।

जारी आदेशों के अनुसार, दिवाली (8 नवंबर, 2026) के मौके पर रात 8:00 बजे से रात 10:00 बजे के बीच पटाखे फोड़े जा सकते हैं। इसी तरह, गुरपुरब (24 नवंबर, 2026) के लिए सुबह 4:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक और रात 9:00 बजे से रात 10:00 बजे तक पटाखे फोड़ने की अनुमति दी गई है। क्रिसमस के मौके पर, 25-26 दिसंबर, 2026 की रात को 11:55 बजे से 12:30 बजे (आधी रात के बाद) के बीच पटाखे फोड़े जा सकते हैं; इसी तरह, नए साल के लिए, 31 दिसंबर, 2026 – 1 जनवरी, 2027 की रात को 11:55 बजे से 12:30 बजे (आधी रात के बाद) के बीच पटाखे फोड़े जा सकते हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि दिवाली, गुरपुरब और नए साल का त्योहारी सीजन आने वाला है। इस दौरान लोग अक्सर पटाखे और आतिशबाजी करते हैं, जिससे न केवल आग लगने का खतरा रहता है, बल्कि इससे शोर और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है।

 

तेज आवाज वाले पटाखों और आतिशबाजी से निकलने वाला शोर उन लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है जो पहले से ही किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, जैसे कि दिल की बीमारी या सांस की तकलीफ वाले लोग, और साथ ही बुजुर्गों पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय और माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेशों का पालन करते हुए, पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए, ये आदेश जारी किए हैं।

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