
BJP Questions CM Bhagwant Mann’s Proposed France Visit : अमृतसर। पंजाब भाजपा के प्रवक्ता एवं सिख विचारक प्रो. सरचंद सिंह खियाला ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा पर सवाल उठाते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था, नशे और गैंगस्टर हिंसा के मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में युवा नशे और हिंसा से प्रभावित हैं तथा कारोबारी जबरन वसूली और गोलीबारी के डर का सामना कर रहे हैं।
जबकि सरकार विदेश यात्राओं के जरिए निवेश लाने के दावे कर रही है। खियाला ने सवाल किया कि पिछली विदेश यात्राओं से पंजाब को कितना निवेश मिला, कितने उद्योग स्थापित हुए और कितने युवाओं को रोजगार मिला। उन्होंने मार्कफेड की अंतरराष्ट्रीय खाद्य मेले में भागीदारी के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी की जरूरत, प्रतिनिधिमंडल में उनकी पत्नी की आधिकारिक भूमिका, यात्रा पर होने वाले सरकारी खर्च और आवश्यक मंजूरियों को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। ये सभी सवाल और आरोप भाजपा प्रवक्ता ने उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब पंजाब के युवा नशीले पदार्थों और गैंगस्टरों की हिंसा का शिकार हो रहे हैं—और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण कारोबारी समुदाय में डर का माहौल है—तब मुख्यमंत्री अपने राज्य की समस्याओं को सुलझाने के बजाय विदेश यात्राओं में व्यस्त हैं। जनता के प्रति इस घोर उपेक्षा को देखते हुए, क्यों न इस स्थिति को पंजाबी की इस कहावत से जोड़ा जाए: “गाँव में आग लगी है और कुत्ता गोबर के ढेर पर आराम कर रहा है”? यह कहावत पंजाब सरकार की मौजूदा प्राथमिकताओं को बिल्कुल सटीक रूप से दर्शाती है। खियाला ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता में आए साढ़े चार साल से अधिक समय हो गया है; फिर भी, न तो पंजाब नशा मुक्त हुआ है और न ही राज्य में निवेश के लिए कोई सुरक्षित माहौल बन पाया है।
अब सरकार विदेशी निवेश लाने के बहाने अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है। सवाल यह उठता है कि इन विदेशी दौरों और दावों के परिणामस्वरूप पंजाब को वास्तव में कितना विदेशी निवेश मिला है? कितने उद्योग स्थापित हुए हैं और कितने युवाओं को रोजगार मिला है? उन्होंने तर्क दिया कि जब कारोबारी और निवेशक जबरन वसूली, गोलीबारी और गैंगस्टरों के आतंक से डरे हुए हैं, तो मुख्यमंत्री की पहली जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था में सुधार करना और निवेशकों का भरोसा बहाल करना होनी चाहिए—न कि विदेश यात्राओं पर जाना। प्रो. खियाला ने इस प्रस्तावित यात्रा के पीछे के मकसद पर भी सवाल उठाया, जो मुख्यमंत्री के जन्मदिन के समय ही हो रही है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा को ‘SIAL’ (अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मेला) में ‘मार्कफेड’ (Markfed) की भागीदारी से जोड़ा जा रहा है।
अगर मार्कफेड वहां अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रहा है, तो मुख्यमंत्री का वहां जाना क्यों जरूरी है? सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस दौरे से पंजाब को क्या ठोस और मापने योग्य लाभ मिलेंगे। प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री की पत्नी को शामिल करने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि इस दौरे में उनकी आधिकारिक भूमिका क्या है, और यात्रा, ठहरने तथा अन्य व्यवस्थाओं पर राज्य के खजाने से कितना खर्च किया जाएगा। जनता को यह जानने का अधिकार है कि इस दौरे का खर्च कौन उठाएगा और इससे पंजाब को क्या फायदा होगा।
सुरक्षा जोखिमों के बावजूद फ्रांस की यात्रा में दिखाई गई जल्दबाजी की ओर इशारा करते हुए, प्रो. खियाला ने कहा कि केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने पहले इस दौरे को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, जिसका कारण चरमपंथी समूहों से संभावित खतरे और फ्रांसीसी सरकार की ओर से कोई औपचारिक निमंत्रण न होना बताया गया था। यदि पंजाब सरकार को खुद विदेश में मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि अब क्या हालात बदल गए हैं और क्या इस दौरे के लिए जरूरी मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के संबंध में स्थापित नियमों, राजनीतिक मंजूरियों और आधिकारिक प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
पंजाब की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस दौरे का उद्देश्य क्या है, इसमें सरकार का कितना खर्च हो रहा है और इससे पंजाब को क्या ठोस लाभ मिलने वाले हैं। प्रो. खियाला ने कहा कि जहां पंजाब के युवा नशे और गैंगस्टरों के आतंक का शिकार हो रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री राज्य के हालात सुधारने के बजाय फ्रांस की यात्रा में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। अगर इस दौरे का मकसद निवेश आकर्षित करना है, तो भगवंत मान को सबसे पहले यह बताना चाहिए कि पिछले साढ़े चार वर्षों में पंजाब में वास्तव में कितना निवेश आया है, और औद्योगिक विकास तथा रोजगार के क्षेत्र में क्या ठोस परिणाम मिले हैं।