Last Updated: October 22, 2026

Dainik Savera Times Logo

UN की रिपोर्ट पर भारत ने जताई कड़ी नाराजगी, दाऊद इब्राहिम को लेकर उठाए सवाल

October 22, 2026

UN की रिपोर्ट पर भारत ने जताई कड़ी नाराजगी, दाऊद इब्राहिम को लेकर उठाए सवाल

नेशनल डेस्कः भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष रिपोर्टर की आतंकवाद-विरोधी रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए निष्पक्षता और सही तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की मांग की है। भारत का कहना है कि रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम और उसके आपराधिक संगठन डी-कंपनी से जुड़े कई अहम तथ्यों का सही तरीके से जिक्र नहीं किया गया।

यूएन की रिपोर्ट पर भारत ने क्यों जताई नाराजगी?
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ तैयार की गई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में तथ्यों को पेश करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल ने अपनी रिपोर्ट में कुछ जरूरी तथ्यों को नजरअंदाज किया है। रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को भारत से जुड़े आपराधिक गिरोह डी-कंपनी का प्रमुख बताया गया है, जिसके आतंकवादी संगठनों से संबंध होने की बात कही गई है।

इस रिपोर्ट को लेकर भारत ने सवाल उठाया कि दाऊद इब्राहिम भारत में आतंकवादी हमलों के मामलों में लंबे समय से वांछित है, लेकिन रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण जानकारी को उचित तरीके से सामने नहीं रखा गया। भारत ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन के अधिकारियों को रिपोर्ट तैयार करते समय निष्पक्षता, जिम्मेदारी और तथ्यों की सटीकता का ध्यान रखना चाहिए।

भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने यूएन में क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का पक्ष रखते हुए भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने विशेष रिपोर्टर की रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विशेष रिपोर्टर की ओर से गलत तथ्यों वाली रिपोर्ट जारी करना और इसके लिए जवाबदेही तय नहीं होना चिंता का विषय है। पुरी के मुताबिक, इस तरह की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच गलत संदेश जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र पहले से ही अपनी विश्वसनीयता और वैधता से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में उसके अधिकारियों की ओर से तथ्यों को सही तरीके से पेश नहीं करना संगठन की छवि और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही या तथ्यों की अधूरी जानकारी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

दाऊद इब्राहिम को लेकर भारत ने क्या उठाए सवाल
रघु पुरी ने अपने बयान में कहा कि दाऊद इब्राहिम केवल अल-कायदा से कथित संबंधों के कारण चर्चा में आने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह भारत में हुए 1993 के आतंकवादी हमलों के मामलों में भी वांछित है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने साल 2003 में डी-कंपनी के सरगना दाऊद इब्राहिम को अल-कायदा से संबंधों के आधार पर अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया था।

भारत का कहना है कि यदि इस फैसले का जिक्र करते समय दाऊद के भारत में वांछित होने और 1993 के हमलों से जुड़े मामलों का उल्लेख नहीं किया जाता, तो इससे पूरे मामले की अधूरी तस्वीर सामने आती है। पुरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में किसी व्यक्ति को शामिल करने के कारणों का विवरण महत्वपूर्ण होता है। इसलिए रिपोर्ट तैयार करते समय इन तथ्यों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

भारत से भागने के बाद पाकिस्तान में रहने का आरोप
भारतीय राजनयिक ने कहा कि दाऊद इब्राहिम साल 2003 में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले ही भारत छोड़ चुका था। भारत के अनुसार, देश से बाहर रहने के दौरान उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से जुड़े होने के कारण संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल किया गया था।

पुरी ने यह भी कहा कि दाऊद इब्राहिम आज भी भारत में वांछित अपराधी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सूची का हवाला देते हुए पाकिस्तान में उसकी मौजूदगी का मुद्दा उठाया। उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी देश में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का पता लगाया गया था और उसे मार गिराया गया था। भारत ने इस संदर्भ में सवाल उठाया कि दाऊद इब्राहिम से जुड़ी जानकारी पेश करते समय उसके भारत में वांछित होने और उसके ठिकाने से संबंधित तथ्यों को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए।

विशेष रिपोर्टर की जवाबदेही पर भी सवाल
भारत की आपत्ति केवल दाऊद इब्राहिम से जुड़े तथ्यों तक सीमित नहीं रही। भारतीय राजनयिक ने विशेष रिपोर्टर की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। पुरी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकार प्राप्त अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियां निभाते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी रिपोर्ट में गलत जानकारी या महत्वपूर्ण तथ्यों की कमी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की चूक संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। भारत ने यह संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद से जुड़े मामलों को पेश करते समय किसी भी देश या संगठन के बारे में अधूरी जानकारी नहीं दी जानी चाहिए।

भारत की मुख्य मांग क्या है
भारत ने इस पूरे मामले में निष्पक्षता, सही तथ्यों और जवाबदेही को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। भारत का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट तैयार करते समय संबंधित व्यक्ति के पूरे रिकॉर्ड और मामले से जुड़े सभी जरूरी तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए। भारत की आपत्ति का मुख्य आधार यह है कि दाऊद इब्राहिम को केवल अल-कायदा से कथित संबंधों के संदर्भ में पेश करना पर्याप्त नहीं है। उसके भारत में वांछित होने और 1993 के आतंकवादी हमलों से जुड़े मामलों की जानकारी भी सामने रखी जानी चाहिए।

 

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें