
चंबा। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज चंबा के ऐतिहासिक चौगान में ‘विकसित भारत-विकसित हिमाचल’ विषय पर आयोजित तीसरे डेस्टिनेशन हिमाचल एक्सपो-2026 के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय संसाधनों और मानवीय क्षमता का प्रभावी उपयोग कर युवाओं, उद्यमियों, किसानों, कारीगरों और महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत/2047 के संकल्प को साकार करने में हिमाचल प्रदेश की भागीदारी और अधिक सशक्त होगी।
राज्यपाल ने कहा कि यह एक्सपो लोगों को रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे आयोजन युवाओं और स्थानीय समुदायों को उपलब्ध अवसरों की जानकारी देने के साथ-साथ विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खोलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत/2047 का लक्ष्य केवल एक परिकल्पना नहीं, बल्कि राष्ट्र के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक राज्य, जिला और गांव विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाए।
राज्यपाल ने संपर्क सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल टनल और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी पहलों ने हिमाचल प्रदेश के दूरदराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा की हैं। बेहतर सड़क संपर्क से बाजारों, पर्यटन स्थलों और आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच आसान हुई है। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक भी पहुंचना चाहिए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
राज्यपाल ने चंबा की अपार पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए ग्रामीण पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और होमस्टे को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। हिमालय का संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र हमारी अमूल्य धरोहर है, इसलिए विकास की प्रत्येक गतिविधि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
राज्यपाल ने चंबा रुमाल सहित प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, लकड़ी की नक्काशी, स्थानीय खाद्य उत्पादों, कृषि एवं बागवानी उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी पहचान और बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता मानकों, डिजिटल मार्केटिंग और प्रभावी विपणन व्यवस्था को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को प्रभावी ढंग से अपनाकर स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और उत्पादकों को व्यापक बाजार उपलब्ध करवाया जा सकता है। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और लोगों की आय में भी वृद्धि होगी।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से कौशल उन्नयन, आधुनिक उपकरणों, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने चंबा के कारीगरों से आग्रह किया कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं, ताकि अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक कला एवं कौशल को भी संरक्षित रखा जा सके।
राज्यपाल ने कहा कि कृषि और बागवानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन सुविधाओं को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। स्थानीय कृषि एवं बागवानी उत्पादों का प्रसंस्करण कर उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं।
राज्यपाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहकर रोजगार सृजक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। पर्यटन, कृषि, प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने युवाओं से केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संस्थागत सहायता का लाभ उठाकर अपने उद्यम स्थापित करने तथा अपने ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने एक्सपो में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, वैज्ञानिक संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और कौशल विकास संगठनों की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस आयोजन के दौरान होने वाले संवाद और संपर्क प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, बाजार उपलब्धता, उद्यमिता तथा रोजगार सृजन के रूप में ठोस परिणाम देंगे। राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत/2047 का संकल्प तभी गति पकड़ेगा, जब किसान समृद्ध होंगे, युवा आत्मनिर्भर बनेंगे, महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, स्थानीय उद्यमों का विस्तार होगा और देश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने तीसरे डेस्टिनेशन हिमाचल एक्सपो-2026 के आयोजन के लिए आयोजकों, विशेष रूप से डॉ. राजीव भारद्वाज और अविष्कार एग्जीबिशन एंड प्रमोशन की टीम को बधाई दी तथा आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
इससे पूर्व, सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने राज्यपाल का स्वागत किया और उन्हें पारंपरिक हिमाचली टोपी, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने स्वागत संबोधन में डॉ. भारद्वाज ने कहा कि तीसरा डेस्टिनेशन हिमाचल एक्सपो-2026 प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि चंबा को एक आकांक्षी जिले से विकास और प्रेरणा के केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। जिले के प्राकृतिक संसाधन, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन की संभावनाएं और स्थानीय उत्पाद विकास के नए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर विधायक नीरज नैयर, डॉ.हंसराज, पूर्व विधायक विक्रम जरयाल, पवन नैयर एवं जिया लाल कपूर, नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष नीलम नैयर, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार सकलानी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
📍 Location: शिमला (शिमला)
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