
उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पटाखों की बिक्री के लिए सुरक्षित स्थान चिह्नित कर नियमानुसार आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही पात्र आवेदकों को निर्धारित नियमों के अनुसार लाइसेंस जारी करना भी सुनिश्चित किया जाए। डीसी ने संबंधित एसडीएम और अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रीन पटाखों की बिक्री के इच्छुक लोगों से आवेदन प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम, नगर पालिका, अग्निशमन विभाग और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर बिक्री के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की जाए, ताकि त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
उपायुक्त ने बताया कि ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए बनाए जाने वाले शेड अज्वलनशील सामग्री से तैयार किए जाएंगे। इन्हें इस प्रकार सुरक्षित बनाया जाएगा कि अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश रोका जा सके। नियमों के अनुसार, पटाखों की बिक्री के लिए बनाए गए दो शेडों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी होनी चाहिए, जबकि सुरक्षित कार्य क्षेत्र से इनकी दूरी कम से कम 50 मीटर रखनी होगी। दुकानों को आमने-सामने भी नहीं बनाया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुकानों के अंदर और निर्धारित सुरक्षित दूरी के भीतर तेल से जलने वाले लैंप, गैस लैंप या खुली बत्तियों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
यदि बिजली की लाइटें लगाई जाती हैं, तो उन्हें दीवार या छत पर सुरक्षित तरीके से फिट करना होगा। इसके अलावा, सभी दुकानों के विद्युत स्विचों को एक मुख्य कंट्रोल स्विच से जोड़ने की व्यवस्था करनी होगी, ताकि आपात स्थिति में बिजली की आपूर्ति तुरंत बंद की जा सके। डीसी ने बताया कि पटाखों की बिक्री के लिए बनाए गए किसी भी शेड के 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं होगी। एक समूह में अधिकतम 50 दुकानें ही स्थापित की जा सकेंगी। दुकानों के समूह में प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था, एंबुलेंस और कम से कम दो अग्निशमन वाहन उपलब्ध होने चाहिए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रमुख स्थानों पर स्थानीय भाषा में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, जिन पर विस्फोटक या खतरनाक पदार्थों से संबंधित चेतावनी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो। प्रशासन का उद्देश्य दिवाली के दौरान ग्रीन पटाखों की बिक्री को निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित करना और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।