Last Updated: November 7, 2026

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नाबालिग से दुष्कर्म, देह व्यापार में धकेलने का आरोप

November 7, 2026

नाबालिग से दुष्कर्म, देह व्यापार में धकेलने का आरोप

Minor Girl Allegedly Abused and Forced into Prostitution : भिवानी। असम की बेसहारा नाबालिग को भिवानी और रोहतक में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने और देह व्यापार में धकेलने का आरोप लगा है। पुलिस ने महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में एक हेड कांस्टेबल की भूमिका भी जांच के घेरे में है। वहीं, पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने महिला सहित दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में एक पुलिसकर्मी की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है। डीएसपी अनूप के नेतृत्व में गठित विशेष जांच टीम (SIT) पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। 13 अक्तूबर को औद्योगिक क्षेत्र थाने में पहुंची नाबालिग ने बताया कि वह असम की रहने वाली है। उसकी मां की करीब सात-आठ साल पहले मौत हो गई थी, जबकि लगभग पांच साल पहले उसके पिता भी घर छोड़कर चले गए थे। परिवार का सहारा न रहने के कारण वह करीब दो साल पहले काम की तलाश में भिवानी आ गई थी। यहां एक युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और मंदिर में शादी कर ली। आरोप है कि शादी के बाद युवक उसके साथ मारपीट करने लगा और उसे घर से बाहर नहीं निकलने देता था।

पीड़िता के मुताबिक, करीब पांच महीने पहले वह किसी तरह घर से निकलकर रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां ममता नाम की महिला के साथ उसका विवाद हो गया। पुलिस उसे चौकी ले गई और दोनों पक्षों के बीच समझौता करवा दिया। आरोप है कि इसी दौरान चौकी में तैनात एक हेड कांस्टेबल ने अपने परिचित शंकर को बुलाया और बच्ची को रातभर उसके गेस्ट हाउस में ठहराने के बाद सुबह भेजने की बात कही। हालांकि, पीड़िता ने आरोप लगाया कि शंकर ने अगले दिन उसे गेस्ट हाउस से जाने नहीं दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद करीब साढ़े तीन महीने तक उसे बंधक बनाकर रखा गया और कथित तौर पर दूसरे लोगों से भी उसका यौन शोषण करवाया गया। करीब डेढ़ महीने पहले वह किसी तरह वहां से भागकर असम पहुंची, लेकिन वहां उसे किसी ने सहारा नहीं दिया। इसके बाद वह वापस भिवानी लौट आई।

पीड़िता ने बताया कि काम की तलाश में बस से रोहतक जाते समय उसकी मुलाकात रोहतक निवासी अंजलि पत्नी रजनीश से हुई। अंजलि उसे अपने घर ले गई, जहां कथित तौर पर उसे बंधक बनाकर गलत काम करवाया गया। 11 अक्तूबर को वह किसी तरह वहां से निकलकर भिवानी पहुंची और दो दिन बाद पुलिस को अपनी आपबीती बताई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने शंकर, अंजलि और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में कथित रूप से लापरवाही बरतने वाले हेड कांस्टेबल की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पीड़िता को बाल कल्याण समिति (CWC), करनाल के सुपुर्द कर दिया गया है।

दूसरी ओर, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो को शिकायत देकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग की है। वर्मा का आरोप है कि हेड कांस्टेबल ने नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने और बाल संरक्षण अधिकारी तक पहुंचाने के बजाय अपने परिचित शंकर के हवाले कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचित नहीं किया गया। वर्मा ने संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित करने और शंकर तथा अंजलि के अलावा मानव तस्करी के संभावित पूरे नेटवर्क की जांच करवाने की मांग की है।

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