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इस देश में नहीं है ट्रैफिक पुलिस, फिर भी नहीं लगता जाम

bhutan traffic system

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भीड़भाड़ वाली सड़कों, लाल-पीली ट्रैफिक लाइट्स और हर मोड़ पर बजते हॉर्न से अगर आप भी परेशान हो जाते हैं तो एक ऐसी जगह की कल्पना कीजिए जहां सड़कें शांत हों, लोग बिना जल्दबाज़ी के गाड़ी चलाते हों और ट्रैफिक संभालने के लिए पुलिस की जरूरत ही महसूस न होती हो। लेकिन आपकी ये कल्पना हकीकत में बदल गई है क्यूंकि सचमुच दुनिया में एक ऐसा देश है जहां न ट्रैफिक लाइट्स का शोर है न हर चौराहे पर खड़े पुलिसकर्मी – फिर भी सड़कों पर व्यवस्था बनी रहती है।

हम बात कर रहे हैं भूटान (Bhutan)की जो अपने शांत जीवन और अनुशासित ट्रैफिक सिस्टम के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है।

बिना ट्रैफिक पुलिस के भी कैसे चलता है सिस्टम
भूटान में आपको हर चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस खड़ी नजर नहीं आएगी लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वहां नियम नहीं हैं। असल में यहां के लोग नियमों को सिर्फ कानून नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। गाड़ी चलाते समय वे खुद ही स्पीड लिमिट का ध्यान रखते हैं दूसरे वाहनों को रास्ता देते हैं और बिना वजह ओवरटेक करने से बचते हैं। यानी जहां दूसरे देशों में नियमों को लागू कराने के लिए पुलिस की जरूरत पड़ती है वहीं भूटान में लोग खुद ही उस भूमिका को निभाते हैं।

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ट्रैफिक लाइट्स क्यों नहीं हैं आम
आपको जानकर हैरानी होगी कि भूटान की राजधानी थिम्फू में एक बार ट्रैफिक लाइट लगाई गई थी लेकिन लोगों को यह व्यवस्था ज्यादा पसंद नहीं आई। लोगों को लगा कि मशीन से बेहतर इंसानी समझ काम करती है। इसके बाद वहां ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए कुछ जगहों पर पुलिसकर्मी हाथ के इशारों से गाड़ियों को गाइड करने लगे। यह व्यवस्था आज भी वहां की पहचान बन चुकी है जहां एक व्यक्ति पूरे चौराहे को सहज तरीके से संभाल लेता है।

कम गाड़ियां और संतुलित जीवन का असर
भूटान में ट्रैफिक का एक बड़ा कारण यह भी है कि वहां वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं है। वहां के लोग जीवन को धीमी गति से जीना पसंद करते हैं। जल्दी पहुंचने की होड़ या हर समय भागदौड़ वहां की संस्कृति का हिस्सा नहीं है। जब लोग शांत और धैर्य के साथ गाड़ी चलाते हैं तो ट्रैफिक अपने आप नियंत्रित हो जाता है।

नियमों का पालन क्यों करते हैं लोग
भूटान में बचपन से ही लोगों को अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की शिक्षा दी जाती है। लोग यह समझते हैं कि सड़क पर की गई एक छोटी गलती भी किसी की जान ले सकती है। इसलिए वे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर गाड़ी चलाते हैं। यही सोच उन्हें बाकी दुनिया से अलग बनाती है।

एक्सीडेंट कम क्यों होते हैं
यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि यहां बिल्कुल भी एक्सीडेंट नहीं होते लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। इसका कारण है- कम ट्रैफिक, सीमित स्पीड और सबसे अहम, लोगों का सावधानी भरा व्यवहार। जब लोग नियमों को मजबूरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी समझते हैं तो हादसों की संभावना अपने आप कम हो जाती है।

भारत के पास और आसान यात्रा
भूटान भारत के बेहद करीब है और भारतीय नागरिकों के लिए यहां जाना भी काफी आसान है। यहां यात्रा करने के लिए पासपोर्ट अनिवार्य नहीं होता जिससे यह जगह भारतीय पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बन जाती है। शांत सड़कों और खूबसूरत नजारों के साथ यह देश एक अलग ही अनुभव देता है। वहां ट्रैफिक पुलिस की जरूरत कम पड़ती है। भूटान की यही खासियत उसे दुनिया के बाकी देशों से अलग बनाती है।

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