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वफादारी की मिसालः कुत्ते को परिवार की तरह दी गई अंतिम विदाई, तेरहवीं पर किया गया भंडारे का आयोजन

Dogs last farewell

Dogs last farewell

हरियाणा डेस्क। साल 1985 में आई सुपरहिट फिल्म ‘तेरी मेहरबानियां’ में कुत्ते ‘मोती’ की वफादारी को आज भी लोग याद करते हैं। लेकिन ऐसी ही एक सच्ची और भावुक कहानी अब हरियाणा के पानीपत से सामने आई है, जिसने लोगों की आंखें नम कर दी हैं। जिले के खटीक बस्ती में रहने वाले एडवोकेट बलबीर पंवार ने अपने पालतू कुत्ते को सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि अपने बेटे की तरह पाला। उन्होंने कुत्ते को अपना सरनेम देकर उसका नाम ‘रॉकी पंवार’ रखा। यह कदम समाज के लिए एक अनोखी और प्रेरणादायक मिसाल बन गया।

13 साल तक घर का सबसे प्यारा सदस्य रहा रॉकी
रॉकी पंवार पिछले 13 वर्षों से बलबीर पंवार के घर में रह रहा था। परिवार के सभी सदस्य उसे घर का सबसे लाड़ला मानते थे। वह हर खुशी और हर दुख में परिवार के साथ रहता था। रॉकी को कभी पालतू जानवर जैसा व्यवहार नहीं मिला, बल्कि वह घर के बच्चे की तरह पला-बढ़ा।

बीमारी से जूझते हुए दुनिया को कहा अलविदा
एडवोकेट बलबीर पंवार ने बताया कि रॉकी पिछले कुछ समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। परिवार ने उसका हर संभव इलाज करवाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद रॉकी को बचाया नहीं जा सका। उसकी मौत के बाद पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।

पूरे रीति-रिवाज से किया गया अंतिम संस्कार
रॉकी की वफादारी का सम्मान करते हुए पंवार परिवार ने उसका अंतिम संस्कार पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया। परिवार के लोग उसकी अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचे और पवित्र गंगा नदी में अस्थि विसर्जन किया। वहां पूजा-अर्चना भी की गई।

तेरहवीं पर हवन और भंडारे का आयोजन
रविवार को रॉकी पंवार की तेरहवीं के मौके पर घर में हवन कराया गया। इसके बाद एक बड़े भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें मोहल्ले और आसपास के कई लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने भावुक होकर रॉकी को श्रद्धांजलि दी।

बेटी की आंखों में आंसू…
इस कार्यक्रम के दौरान बलबीर पंवार की बेटी वर्षा और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों में आंसू साफ नजर आ रहे थे। वर्षा ने कहा, “रॉकी सिर्फ हमारा कुत्ता नहीं था, वह मेरा भाई था। उसके जाने से घर में जो खालीपन आया है, वह कभी नहीं भर सकता।”

जानवरों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश
एडवोकेट बलबीर पंवार का कहना है कि समाज को जानवरों के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जानवर बोल नहीं सकते, लेकिन उनकी वफादारी इंसानों से कहीं ज्यादा होती है। हमें उनसे प्रेम और सम्मान से पेश आना चाहिए।”

पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना आयोजन
पानीपत की खटीक बस्ती में हुआ यह आयोजन अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह कहानी यह संदेश देती है कि प्यार, सम्मान और अपनापन सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होता, बल्कि बेजुबान जानवर भी परिवार का हिस्सा हो सकते हैं।

 

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