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पूर्णिमा की रात में सुनाई देती हैं चीखें, जानिए भारत की 6 भूतिया जगह, जहां आप कभी नहीं जाना चाहोगे

6 haunted places

6 haunted places

भारत सिर्फ मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए ही नहीं जाना जाता, भारत की मिट्टी में इतिहास की परतें बसी हैं, कभी राजसी वैभव की, तो कभी दर्दनाक रहस्यों की। अगर आप भी रोमांच और रहस्य की तलाश में हैं, तो जानिए भारत की छह सबसे हॉन्टेड जगहें और उनके पीछे की कहानियां। ये जगहें सिर्फ भूतिया नहीं, बल्कि गुजरे ज़माने की चीखों का आईना हैं।

1. अग्रसेन की बावली, दिल्ली
दिल्ली के बीचों-बीच, यह सदियों पुरानी बावली अपने आप में एक अलग दुनिया की तरह है। 60 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी, इस बावली की खामोशी और गहरे काले पानी के कारण इसे अक्सर भूतिया कहा जाता है। यहां नीचे उतरते ही हवा अचानक भारी और अजीब लगने लगती है।

2. दिल्ली कैंट, दिल्ली
दिल्ली की भीड़-भाड़ से कुछ ही दूरी पर, यहां की सड़कें एक डरावनी कहानी के लिए मशहूर हैं। कहा जाता है कि यहां पर सफेद साड़ी पहने एक महिला दिखती है और गाड़ी रोकने का अनुरोध करती है। अगर आप मना करते हैं, तो वो आपकी गाड़ी के साथ दौड़ सकती है। रात में ड्राइव करते समय यह कहानी लोगों के होश उड़ा देती है।

3. भंघरगढ़ किला, राजस्थान
राजस्थान का यह किला इतना डरावना है कि सूर्यास्त के बाद यहां प्रवेश करना मना है। कहते हैं कि किसी साधु की शाप या जादूगर की साजिश ने इस किले और उसके गांव को वीरान कर दिया। बावजूद इसके दुनिया भर के साहसी और डर के शौकीन इसे देखने आते हैं। ये भी कहा जाता है कि आज तक रात में जो भी यहां रुक है उसकी मौत हो गई है

4. कुलधारा, राजस्थान
जैनिसलमेर के पास स्थित कुलधारा गांव, जिसे 1800 के दशक में रातोंरात छोड़ दिया गया। कहा जाता है कि निवासियों ने शाप दिया ताकि कोई यहां दोबारा न बस पाए। आज भी यहां की वीरानी और सुनसान गलियों में अजीब ऊर्जा महसूस की जा सकती है।

5. डाउ हिल, कर्सियॉन्ग, पश्चिम बंगाल
यहां का विक्टोरिया बॉयज़ स्कूल और आसपास के घने जंगलों में एक अलग ही रहस्य लिए हैं। कई लोगों ने यहां खाली स्कूल के गलियारों में छाया जैसी आकृतियों और अजीब आवाजें सुनी हैं। जंगल और स्कूल का यह मिलाजुला वातावरण डर और रोमांच का मिश्रण है।

6.शनिवार वाडा, पुणे
1732 में बना यह किला मराठा पेशवाओं का घर था। लेकिन इसकी भव्य दीवारों के पीछे छुपी हैं कई भयानक कहानी। 1773 में युवा पेशवा नारायणराव की हत्या उनके ही चाचा और चाची के हाथों हुई थी। लोग कहते हैं कि आज भी पूर्णिमा की रात में “काका, मला वाचवा!” जैसी चीखें सुनाई देती हैं।

 

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