Dainik Savera Times

EV कारों से भर गया लोगों का मन, फिर से पेट्रोल-डीजल वाहनों पर लौट रहे खरीददार

EV Car Market Trends

नई दिल्ली: दुनिया भर में कार खरीदार अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और हाइब्रिड कारों की तुलना में पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की ओर लौट रहे हैं। अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की ग्लोबल रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि उपभोक्ताओं के बीच ईवी अपनाने को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।

नीति परिवर्तन बदल रहे हैं खरीदारों का रुख

पश्चिमी देशों में हाल ही में हुए नीति बदलावों का असर वाहन बाजार पर दिख रहा है। अमेरिका में नए प्रस्तावित नियमों के तहत फ्यूल-इकोनॉमी मानकों को कम करने की योजना है, जिससे पेट्रोल और डीजल वाहन सस्ते और आकर्षक विकल्प बन सकते हैं। यूरोप में भी 2035 से नए पेट्रोल-डीजल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों को धीरे-धीरे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। EY के ग्लोबल मोबिलिटी हेड, कॉन्सटैन्टिन एम. गाल के अनुसार, सरकारें अब ईवी संक्रमण को “धीरे-धीरे” होने वाली प्रक्रिया मान रही हैं।

ईवी अपनाने में रुकावटें

चार्जिंग नेटवर्क की अपर्याप्तता, ईवी की ऊंची कीमतें और वैश्विक राजनीतिक तनाव उपभोक्ताओं को ईवी खरीदने से रोक रहे हैं। कई देशों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त नहीं है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा कठिन हो जाती है। वहीं, चीनी ईवी पर बढ़े शुल्क और सस्ते पेट्रोल-डीजल वाहनों का निर्यात वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा रहा है।

ऑटो इंडस्ट्री पर प्रभाव

कार खरीदारों की आईसीई की ओर वापसी से कंपनियों को रणनीति बदलनी पड़ सकती है। अब उन्हें पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों मॉडलों पर निवेश करना होगा, जिससे लागत बढ़ेगी और भविष्य की योजना कठिन होगी। पर्यावरण समूहों का कहना है कि ईवी संक्रमण में देरी वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी बाधा बन सकती है।

ये भी पढ़ें: क्लास की लड़कियों को 8 साल के बच्चे ने दिया ऐसा गिफ्ट; दंग रह गए मां-बाप

आंकड़ों में झलक

वैश्विक स्तर पर 50% खरीदार अपनी अगली कार के लिए आईसीई मॉडल चुनना चाहते हैं, जो पिछले साल की तुलना में 13% अधिक है।

बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहनों की पसंद घटकर 14% रह गई, जो साल-दर-साल 10% की गिरावट है।

हाइब्रिड कारों में रुचि 16% रह गई।

ईवी खरीदने का विचार रखने वाले 36% ग्राहक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अब निर्णय टाल रहे हैं।

इस रुझान से स्पष्ट है कि इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी पूरी तरह से पारंपरिक वाहनों की जगह नहीं ले पा रहे हैं और ऑटोमोबाइल उद्योग को लम्बी अवधि तक दोनों तकनीकों के साथ तालमेल बैठाना होगा।

Exit mobile version