ढाका: बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने बुधवार को आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास को राजद्रोह के मामले में जमानत दे दी। न्यायमूर्ति मोहम्मद अताउर रहमान और न्यायमूर्ति मोहम्मद अली रेजा की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
25 नवंबर को हुए थे गिरफ्तार
चिन्मय कृष्ण दास, जो बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता और इस्कॉन के पूर्व नेता हैं, को पिछले साल 25 नवंबर को ढाका हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया और राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया। दास ने पहले चटगांव की एक निचली अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन 2 जनवरी को उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन किया।
दो सप्ताह के भीतर मांगा था जवाब
इससे पहले, फरवरी में बांग्लादेश उच्च न्यायालय ने सरकार से यह पूछा था कि दास को जमानत क्यों नहीं दी जानी चाहिए। इस पर दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि अदालत ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा था। चटगांव की अदालत में 2 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान दास के वकील ने तर्क दिया कि वह अपनी माँ के प्रति श्रद्धा के समान ही मातृभूमि का सम्मान करते हैं और वह देशद्रोही नहीं हैं।
इसके बावजूद, अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब बांग्लादेश उच्च न्यायालय ने चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी है। इस मामले ने बहुत ध्यान आकर्षित किया है और लोग बांग्लादेश उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई पर नज़र बनाए हुए हैं।