नेशनल डेस्क : दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक महिला मित्र के साथ सार्वजनिक रूप से अश्लील हरकत करने के मामले में भाजपा नेता मनोहर लाल धाकड़ को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब एक वायरल वीडियो में धाकड़ को अपनी महिला मित्र के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए देखा गया था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, दिल्ली की कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी, क्योंकि इस मामले में लगाए गए आरोप जमानती हैं। कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता), धारा 285 (जान-माल को खतरे में डालना) और धारा 3(5) (सामूहिक अपराध) के तहत आरोप लगाए थे।
अश्लील हरकतों पर BNS की धाराएं और सजा
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकतों का अपराध बेहद गंभीर माना जाता है। यहां हम इन धाराओं के बारे में विस्तार से जानते हैं:
- धारा 296 – सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता
- जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकतें करता है, तो यह धारा लागू होती है।
- इस धारा के तहत यदि किसी व्यक्ति की अश्लीलता अन्य लोगों को असहज या परेशान करती है, तो यह अपराध माना जाता है। हालांकि, यह एक हल्की श्रेणी का अपराध है, और इसमें दंड की गंभीरता भी कम होती है।
- यह अपराध मुख्य रूप से सामाजिक अशांति को रोकने के लिए है, जहां सार्वजनिक स्थान पर किसी के निजी आचरण से आम लोगों को परेशानी होती है।
- धारा 285 – जान-माल को खतरे में डालना
- इस धारा के तहत अगर किसी व्यक्ति के द्वारा किए गए कार्य से दूसरों की जान या माल को खतरा होता है, तो यह अपराध माना जाता है।
- यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति अपने आचरण से किसी को शारीरिक या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने की स्थिति में हो।
- धारा 3(5) – सामूहिक अपराध
- यह धारा सामूहिक रूप से किए गए अपराधों के लिए है, जहां एक से अधिक लोग मिलकर अपराध करते हैं।
- इसमें मुख्य रूप से समूहों के द्वारा किया गया असामाजिक या अवैध कार्य शामिल होता है।
क्या है सजा का प्रावधान?
- धारा 296: सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत करने का अपराध हल्के रूप में माना जाता है और इसमें दोषी पाए जाने पर आरोपी को अधिकतम एक साल की सजा या जुर्माना हो सकता है। हालांकि, यह सजा केस के तथ्यों और अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।
- धारा 285: जान-माल को खतरे में डालने का मामला है, तो इस पर सजा का प्रावधान अधिक गंभीर हो सकता है। इसमें आरोपी को अधिकतम 6 महीने की सजा या जुर्माना हो सकता है, या दोनों हो सकते हैं।
- धारा 3(5): सामूहिक अपराध में आरोपी को जुर्माना या एक साल तक की सजा हो सकती है, या दोनों भी हो सकते हैं।
कुल मिलाकर स्थिति
इस मामले में, भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन इन आरोपों के बावजूद अदालत ने आरोपी भाजपा नेता को जमानत दे दी है। हालांकि, इन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को सजा मिल सकती है, लेकिन यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा। इस मामले में पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामाजिक मीडिया के जरिए इस तरह के मामलों में बहुत से सबूत सार्वजनिक हो जाते हैं, जिससे जांच और सजा का रास्ता साफ होता है।

