जकार्ता: वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव और अमेरिका के संरक्षणवादी रुख के बीच चीन और इंडोनेशिया के शीर्ष नेतृत्व ने आपसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम बातचीत की। रविवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने जकार्ता स्थित मर्डेका पैलेस में मुलाकात की, जिसमें दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के मद्देनज़र व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी को लेकर रणनीतिक चर्चा की।
चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर शनिवार को जकार्ता पहुंचे, जो इस वर्ष की उनकी पहली विदेश यात्रा है। उनकी यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक मंच पर एकतरफावाद, संरक्षणवाद और आर्थिक टकराव जैसी चुनौतियाँ गहराती जा रही हैं।
ली क्यांग ने जकार्ता में आयोजित इंडोनेशिया-चीन व्यापार मंच में 60 चीनी उद्योगपतियों के साथ हिस्सा लिया और कहा, “वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति जटिल और गतिरोधपूर्ण है। दुनिया के कई हिस्सों में धमकाने वाला व्यवहार और व्यापारिक टकराव बढ़ रहा है। ऐसे समय में एशिया के प्रमुख देशों को मिलकर आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता है।”
इंडोनेशिया और चीन, दोनों ब्रिक्स समूह के सदस्य होने के नाते, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में वैश्विक मंच पर साझा हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रधानमंत्री ली ने बताया कि चीन लगातार नौ वर्षों से इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चीन की अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 की शुरुआत में ही उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है, भले ही वैश्विक परिस्थितियाँ कठिन बनी हुई हों।
राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने बैठक में चीन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “चीनी निवेश ने न केवल इंडोनेशियाई अर्थव्यवस्था को गति दी है, बल्कि हमारे युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी अवसर भी उपलब्ध कराए हैं। हम चीन की कंपनियों का हमारे देश में और अधिक निवेश के लिए स्वागत करते हैं।”
दोनों देशों के बीच बीते वर्ष व्यापार 6.1% की वृद्धि के साथ 147.8 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया, जो इस बात का संकेत है कि एशिया की ये दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ आपसी सहयोग को नए मुकाम पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बैठक के दौरान ली ने इस बात का भी उल्लेख किया कि वर्ष 2025, बांडुंग सम्मेलन की 70वीं वर्षगांठ का प्रतीक है जहाँ एशिया और अफ्रीका के देशों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी थी। उन्होंने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए शांतिपूर्ण सहयोग की विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की। यह उच्चस्तरीय मुलाकात न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भी इन दोनों देशों की भूमिका को और अधिक निर्णायक बना सकती है।
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