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‘कांग्रेस अपना चुनाव चिन्ह हाथ से बदलकर लुंगी रख ले’, सीएम हिमंत सरमा का हमला

नेशनल डेस्क: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने धेमाजी और तिनसुकिया जिलों से पंचायत चुनाव प्रचार की शुरुआत की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा। धेमाजी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को अब अपना चुनाव चिन्ह ‘हाथ’ से बदलकर ‘लुंगी’ रख लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में सिर्फ लुंगी, धोती, धागा और मच्छरदानी बांटी जाती थी। लेकिन बीजेपी सरकार ने असम को असली विकास दिया है।

कांग्रेस से पूछे ये सवाल 
उन्होंने कांग्रेस से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या कांग्रेस के समय में कॉलेजों में मुफ्त दाखिला होता था? नहीं। क्या 10वीं कक्षा का फॉर्म भरने के लिए फीस लगती थी? हाँ। क्या कांग्रेस सरकार ने धेमाजी में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज बनवाए? नहीं। क्या मुफ्त चावल, ओरुनोदोई योजना और मजबूत बांध की सुविधा थी? नहीं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बीजेपी सरकार ने ये सभी सुविधाएं दी हैं और असम को आगे बढ़ाया है।


विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाना हमारा लक्ष्य 
सरमा ने यह भी कहा कि पिछले 4 सालों में राज्य सरकार ने 1.5 लाख सरकारी नौकरियां बिना किसी भ्रष्टाचार के दी हैं। उन्होंने कहा, “अगर मैंने हर नौकरी के बदले एक लाख रुपये लिए होते तो मेरे पास 15,000 करोड़ रुपये जमा हो जाते, लेकिन हम गरीबों की सेवा कर रहे हैं। अब कोई भी रिश्वत लेकर नौकरी नहीं पाएगा।” उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर गांव को एक आदर्श गांव बनाना है और विकास को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।

दो चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
असम में पंचायत चुनाव 2 मई और 7 मई को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 11 मई को की जाएगी। कुल 1.80 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे, इनमें 90.71 लाख पुरुष, 89.65 लाख महिलाएं और 408 अन्य मतदाता शामिल हैं। राज्य में 25007 मतदान केंद्र बनाए गए हैं

चुनाव में कुल:
– 21920 ग्राम पंचायत सदस्य
– 2192 ग्राम पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
– 2192 आंचलिक पंचायत सदस्य
– 181 आंचलिक पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
– 397 जिला परिषद सदस्य चुने जाएंगे।

इस तरह असम में पंचायत चुनाव का माहौल जोर पकड़ रहा है और राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए प्रचार में जुटी हैं।

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