नेशनल डेस्क: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत द्वारा रूस से तेल आयात कम करने के बयान को लेकर हमला किया है। उन्होंने पीएम मोदी को “मौनी बाबा” कहकर तंज कसा, यह बताते हुए कि जब भी ट्रंप कोई बड़ा दावा करते हैं, मोदी चुप रहते हैं।
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ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीद में कमी लाएगा। उन्होंने कहा कि उनके “अच्छे दोस्त” यानी प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भारत रूस से तेल खरीद को कम करेगा और लगभग बंद कर देगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। ट्रंप की यह टिप्पणी यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने की कोशिशों के तहत आई है, जिसमें पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए उसके तेल व्यापार को घटाना जरूरी है।
President Trump has yet again said that he has been assured by his good friend that India will cut back on its imports of oil from Russia. But that good friend suddenly becomes a Mauni Baba whenever President Trump says he stopped Operation Sindoor and now when he says that India… https://t.co/Oafq9SglhI
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 18, 2025
जयराम रमेश ने ट्रंप के इस बयान पर पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर से कहा कि उनके अच्छे दोस्त ने भारत को रूस से तेल खरीद कम करने का आश्वासन दिया था, लेकिन जैसे ही ट्रंप यह बयान देते हैं, पीएम मोदी अचानक मौनी बाबा बन जाते हैं।” इस बीच, जयराम रमेश ने भारत और चीन के बीच व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2025 के अप्रैल-सितंबर के बीच चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 54.4 अरब डॉलर हो गया है, जो पहले 49.6 अरब डॉलर था।
ट्रंप के बयान के बाद भारत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने और स्थिर ऊर्जा कीमतों को सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लंबे समय से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, और अमेरिकी प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने में रुचि दिखाई है। भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा आपूर्ति नीति को पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बना रहा है और किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद अपने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेगा।
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