India Postponed Indus Water Treaty: नेशनल डेस्क : भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 से लागू सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। भारत सरकार ने इस संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी द्वारा पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय को भेजे गए औपचारिक पत्र के माध्यम से दी गई।
पत्र में भारत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मौजूदा हालात और भारत की जल नीति के व्यापक मूल्यांकन के बाद लिया गया है। देबाश्री मुखर्जी ने अपने पत्र में लिखा, “भारत सरकार सिंधु जल संधि 1960 को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर रही है।
-क्या है सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों जैसे कि, सतलुज, ब्यास और रावी का जल उपयोग करने का अधिकार मिला था, जबकि पश्चिमी नदियाँ सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान को दिया गया।
जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखा है।
पत्र में लिखा है, “भारत सरकार ने यह निर्णय लिया है कि सिंधु जल संधि 1960 को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाएगा।” pic.twitter.com/xosbDFyfmt
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 24, 2025
-क्या हैं स्थगन के मायने
इस कदम के बाद भारत अब पश्चिमी नदियों के जल प्रबंधन पर पुनर्विचार कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान पर जल-संबंधी दबाव बना सकता है और भविष्य में भारत के रणनीतिक निर्णयों को नई दिशा दे सकता है।
-राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश
यह फैसला भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि वह अपने संसाधनों का उपयोग देशहित में करने से पीछे नहीं हटेगा, खासकर तब जब द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हों। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह स्थगन अस्थायी है, लेकिन इसकी मियाद और प्रभाव भारत की भविष्य की कूटनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।

