नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर में पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर की 38 दिवसीय अमरनाथ यात्रा को इस साल खास सुरक्षा इंतजामों के साथ शुरू किया जाएगा। यह यात्रा 3 जुलाई से 9 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान 581 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कंपनियों, ड्रोन, जैमर, बम निरोधक दस्तों और खोजी कुत्तों (K9 यूनिट) की भारी तैनाती की जा रही है।
सुरक्षा के खास इंतजाम क्यों?
यह व्यापक सुरक्षा इंतजाम 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किए गए हैं, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। इसी वजह से इस बार यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर कोई चूक नहीं होने दी जाएगी।
यात्रा मार्गों पर सख्ती
यात्रा के दौरान पहलगाम और बालटाल दोनों रास्तों पर सुरक्षा कड़ी रहेगी। काफिले के गुजरने के समयहाईवे और आसपास की सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा ताकि कोई खतरा न हो। रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) रास्तों को पहले से जांचकर सुरक्षित करेगी। त्वरित कार्रवाई दल (QAT) किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जवाब देंगे। बम निरोधक दस्ते (BDS) विस्फोटकों को खोजने और नष्ट करने के लिए तैयार रहेंगे।ड्रोन और खोजी कुत्ते (K9) से भी निगरानी की जाएगी।
पहली बार जैमर की तैनाती
अधिकारियों ने बताया कि इस बार पहली बार यात्रा काफिले की सुरक्षा के लिए जैमर लगाए जाएंगे ताकि किसी भी संभावित धमाके या साजिश को रोका जा सके। इस साल अमरनाथ यात्रा को 38 दिनों तक सीमित किया गया है, जबकि पिछले साल यह 52 दिन चली थी। यह फैसला सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए लिया गया है।
उच्च स्तरीय निगरानी और तैयारी
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB), जम्मू-कश्मीर प्रशासन, CAPF, और पुलिस मिलकर सुरक्षा और लॉजिस्टिक व्यवस्था को संभाल रहे हैं। CRPF के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने खुद पहलगाम, जम्मू और बेस कैंप का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया।
अमरनाथ यात्रा का महत्व
यह यात्रा भगवान शिव को समर्पित होती है और हिमालय में स्थित 3,888 मीटर ऊंची गुफा तक जाती है, जहां प्राकृतिक बर्फ से बना शिवलिंग दिखाई देता है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर आते हैं। यह यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में होती है और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की निगरानी में पूरी होती है।
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