नेशनल डेस्क। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों को उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक (DGP) के बयान झूठे और गढ़ी हुई कहानी पर आधारित हैं। यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जिसके जरिए किसी बेगुनाह को फंसाकर प्रशासन अपनी मर्जी चलाना चाहता है।
लद्दाख के लोग भी कर रहे विरोध
गीतांजलि का कहना है कि सिर्फ वह अकेली ही नहीं, बल्कि पूरा लद्दाख इन आरोपों को मानने से इंकार करता है। उनका कहना है कि ये सब बनावटी कहानियाँ हैं, ताकि किसी को बलि का बकरा बनाकर प्रशासन अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा सके।
सीआरपीएफ की गोलीबारी पर उन्होंने बड़ा सवाल उठाया कि सीआरपीएफ को गोली चलाने का आदेश आखिर किसने दिया? अपने ही नागरिकों पर गोली कौन चलाता है? खासकर वहां, जहां पहले कभी हिंसक प्रदर्शन हुए ही नहीं।
#WATCH | Ladakh: On Police’s allegations against Sonam Wangchuk, his wife, Gitanjali J Angmo, says, “We strongly condemn the DGP’s statements. Not only I, but everyone in Ladakh denounces those allegations… This narrative is being fabricated to blame and frame someone, allowing… pic.twitter.com/6FuPwd4Wlp
— ANI (@ANI) September 30, 2025
सोनम वांगचुक का कोई लेना-देना नहीं
गीतांजलि ने साफ कहा कि सोनम वांगचुक का इस घटना से कोई संबंध नहीं है। जिस समय यह सब हुआ, वे किसी और जगह शांतिपूर्वक भूख हड़ताल पर बैठे थे। अगर वे वहाँ मौजूद ही नहीं थे, तो किसी को उकसाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
छठे शेड्यूल को रोकने की कोशिश
गीतांजलि ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि असली मकसद लद्दाख में छठे शेड्यूल को लागू न करना है। इसके लिए एक झूठी कहानी बनाई जा रही है और किसी को फंसाने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार, डीजीपी के बयान एक एजेंडे का हिस्सा हैं। सरकार किसी भी हाल में 6वां शेड्यूल लागू नहीं करना चाहती और इसके लिए अब बलि का बकरा ढूंढा जा रहा है।
24 सितंबर को हुई थी हिंसा
आपको बता दें कि, 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद लेह में बीएनएसएस, 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किया गया है। जिसके बाद से जिले में पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध है; बिना पूर्व लिखित अनुमति के कोई भी जुलूस, रैली या मार्च नहीं निकाला जा सकता।
लेह में फिलहाल सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। लद्दाख के लोग केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। हिंसा के सिलसिले में कुल 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, साथ ही इस हिंसा में चार व्यक्तियों की अब तक मौत हो चुकी है।

