IAF Jaguar Fighter Jet Crashes : नेशनल डेस्क। गुजरात के जामनगर में भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव का पार्थिव शरीर आज शुक्रवार को उनके गृह नगर रेवाड़ी पहुंचा। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, वहां मौजूद लोगों ने ‘सिद्धार्थ यादव अमर रहें’ के नारे लगाए। इसके बाद परिवार के सदस्य और पूर्व सैनिकों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी।
रेवाड़ी के रहने वाले 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव 2 अप्रैल को गुजरात के जामनगर में एक नियमित उड़ान (रुटीन सॉर्टी) पर थे। इस दौरान उनके जगुआर लड़ाकू विमान में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। उन्होंने पूरी कोशिश की कि विमान को सुरक्षित लैंड कराया जा सके, लेकिन अंत में विमान क्रैश हो गया और वह वीरगति को प्राप्त हो गये।
VIDEO | A Jaguar fighter jet of the Indian Air Force crashed at a village near Jamnagar IAF station in Gujarat on Wednesday night while on a training mission, with one of the pilots ejecting safely. The second pilot is missing.
(Source: Third Party) pic.twitter.com/0Zg5sZ7NHo
— Press Trust of India (@PTI_News) April 2, 2025
हादसे से ठीक दस दिन पहले, 23 मार्च को सिद्धार्थ की सगाई हुई थी। उनकी शादी 2 नवंबर को होने वाली थी। वे हाल ही में 31 मार्च को अपने परिवार के साथ रेवाड़ी में समय बिताकर ड्यूटी पर लौटे थे। उनकी मौत की खबर से उनके परिवार, दोस्तों और पूरे शहर में शोक की लहर है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
31 मार्च को सिद्धार्थ यादव अपनी छुट्टी खत्म करके रेवाड़ी से जामनगर एयरफोर्स स्टेशन लौटे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। जब रेवाड़ी में उनके विमान हादसे की खबर पहुंची, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, अंतिम संस्कार में शामिल होने शहीद की मंगेतर सानिया भी पहुंची। इस दौरान वह पार्थिव देह को देख रोती रहीं। सिद्धार्थ की तस्वीर देख सानिया बोली, “बेबी तू आया नहीं मुझे लेने। तूने कहा था तू आएगा।”
उनका पार्थिव शरीर कल सुबह रेवाड़ी के सेक्टर-18 में पहुंचेगा, जिसके बाद उनके पैतृक गांव भालखी-माजरा ले जाया जाएगा। वहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव ने बताया कि जब विमान में खराबी आई, तो सिद्धार्थ ने पहले अपने साथी को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि विमान किसी घनी आबादी वाले इलाके में न गिरे। अपने कर्तव्य को निभाते हुए उन्होंने विमान को खाली स्थान की ओर मोड़ दिया, लेकिन इस कोशिश में वे खुद शहीद हो गए। उनके इस बलिदान पर पूरा देश गर्व कर रहा है। भारतीय वायुसेना के इस जांबाज को हर कोई याद रखेगा।
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