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बेंगलुरु भगदड़ मामले में RCB प्रबंधन खिलाफ हुई FIR दर्ज, लगी यह धाराएं

June 5, 2025

बेंगलुरु भगदड़ मामले में RCB प्रबंधन खिलाफ हुई FIR दर्ज, लगी यह धाराएं

Bengaluru stampede case: पुलिस ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी), डीएनए इवेंट मैनेजमेंट कंपनी और कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) के प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने 4 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हुई भगदड़ की घटना के संबंध में उन्हें आरोपी बनाया है। इस घटना में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई थी।

यह घटनाक्रम दुखद घटना के 24 घंटे बाद और विपक्ष तथा कार्यकर्ताओं की आलोचना के बीच हुआ है, जिन्होंने एफआईआर दर्ज करने के बजाय केवल अप्राकृतिक मृत्यु रिपोर्ट (यूडीआर) दर्ज करने के सरकार के कदम पर सवाल उठाए हैं।

बेंगलुरु शहर के सेंट्रल डिवीजन में कब्बन पार्क पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। मामले में आरसीबी प्रबंधन को पहला आरोपी बनाया गया है। डीएनए इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को दूसरा आरोपी बनाया गया है और केएससीए को मामले में तीसरा आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 118 (खतरनाक हथियारों या साधनों का उपयोग करके स्वेच्छा से चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत दर्ज की गई है।

पुलिस ने एफआईआर में तीनों पक्षों के साथ अन्य का भी उल्लेख किया है, जिससे संकेत मिलता है कि और लोगों पर भी मामला दर्ज होने की संभावना है।

बेंगलुरू में चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास भगदड़ की घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज न करने के लिए कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, कर्नाटक भाजपा ने गुरुवार को एक मौजूदा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा घटना की न्यायिक जांच की मांग की।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार से बेंगलुरु में चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास भगदड़ की घटना के संबंध में चूक और अन्य विवरणों पर रिपोर्ट मांगी, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई।

भगदड़ की घटना का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने स्वप्रेरणा से जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज की और राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस त्रासदी पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से पूछा कि क्या मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन किया गया था और क्या विजय उत्सव के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम में स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त दिशा-निर्देश तैयार किए गए थे।

सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी ने त्रासदी पर रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि चिन्नास्वामी स्टेडियम की बैठने की क्षमता 35,000 है, लेकिन लगभग 2.5 लाख लोग एकत्र हुए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि आम तौर पर क्रिकेट मैचों के दौरान भीड़ पर नजर रखने के लिए 700 पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाती है, लेकिन उत्सव के दौरान विभाग ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 1,600 पुलिस कर्मियों की तैनाती की थी।

इससे पहले, कर्नाटक पुलिस ने भगदड़ के दौरान 11 लोगों की मौत से जुड़ी घटना के संबंध में अप्राकृतिक मौत के मामले (यूडीआर) दर्ज किए थे। कब्बन पार्क पुलिस ने 11 यूडीआर मामले दर्ज किए हैं, और अब तक इस घटनाक्रम के संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

इस कदम से आक्रोश फैल गया, क्योंकि पुलिस विभाग के पास केएससीए और डीएनए इवेंट मैनेजमेंट कंपनी पर मामला दर्ज करने का विकल्प था।

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर भगदड़ की घटना में स्वत: संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करने और न्यायिक जांच करने का तत्काल अनुरोध किया है।

इसके अलावा, सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने गुरुवार को कब्बन पार्क पुलिस में सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार, केएससीए के पदाधिकारियों और अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में, कृष्णा ने मांग की कि पुलिस बीएनएस अधिनियम की धारा 106 (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज करे।

शिकायत की एक प्रति कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ को भी भेजी गई है और याचिका में इसे गंभीर मामला बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

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