
नेशनल डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के बाद से अमेरिकी सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें से एक कदम भारत के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास का है। यह युद्धाभ्यास ‘टाइगर ट्रायम्फ’ नाम से शुरू होने जा रहा है, जो भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और संचालन क्षमता को मजबूत करना है।
‘टाइगर ट्रायम्फ’ का उद्देश्य
भारत और अमेरिका के सेनाएं इस अभ्यास में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों पर खास ध्यान देंगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि दोनों सेनाएं आपसी सहयोग से मिलकर प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को कैसे प्रभावी तरीके से अंजाम दें। विशेष रूप से म्यांमार के भूकंप पीड़ितों तक मदद पहुँचाने के लिए यह अभ्यास किया जाएगा। भारतीय सेना की सत्रुजीत ब्रिगेड फिलहाल म्यांमार में भूकंप पीड़ितों के लिए मदद भेजने में लगी हुई है।

युद्धाभ्यास की अवधि और स्थान
यह युद्धाभ्यास 2 अप्रैल से शुरू होकर 13 अप्रैल तक चलेगा। यह अभ्यास विशाखापट्टनम और काकीनाडा के तटीय क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा, जो भारत के पूर्वी तट पर स्थित हैं। इन स्थानों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यह समुद्री और हवाइ दोनों प्रकार की गतिविधियों के लिए उपयुक्त हैं।
युद्धाभ्यास में शामिल दल और उपकरण
इस अभ्यास में भारत और अमेरिका दोनों ही देशों की सेनाओं के कई प्रमुख सैन्य उपकरण और सेनाएं शामिल होंगी:
Indian and U.S. armed forces held the opening ceremony to launch this year’s Exercise Tiger Triumph in Visakhapatnam, India, on April 1, 2025.
Read More: https://t.co/8jddLLirBh pic.twitter.com/czcCMggGin
— 7th Fleet (@US7thFleet) April 1, 2025

प्रमुख उद्देश्यों पर फोकस
यह अभ्यास न केवल दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य तालमेल को बढ़ाएगा, बल्कि विशेष रूप से प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों के लिए एक बेहतर कार्यप्रणाली विकसित करने में मदद करेगा। म्यांमार के भूकंप पीड़ितों के संदर्भ में, यह युद्धाभ्यास यह सुनिश्चित करेगा कि दोनों सेनाएं मिलकर किस प्रकार राहत कार्यों को अधिक प्रभावी और द्रुत तरीके से कर सकती हैं।
‘टाइगर ट्रायम्फ’ भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य आपसी सहयोग, मानवीय सहायता, और आपदा राहत कार्यों को मजबूत करना है। यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच के सामरिक संबंधों को मजबूत करेगा और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए दोनों देशों के सैन्य बलों को तैयार करेगा।